उत्तर प्रदेश का पहला ग्लास स्काई वाक ब्रिज चित्रकूट में बनकर तैयार हो चुका है। इस जगह को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। किसी जमाने में डकैतों की चहलकदमी के लिए मशहूर रहे चित्रकूट के ये जंगल अब पर्यटकों को खूब लुभा रहे हैं।
पर्यटकों के बीच इन जंगलों का आकर्षण बढ़ाने तथा उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए इस ग्लास ब्रिज को तैयार किया गया है। मिली जानकारी के अनुसार चित्रकूट ग्लास ब्रिज निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। पर्यटकों को इस ग्लास ब्रिज का आकार सबसे अधिक लुभावना लगेगा। इस ग्लास ब्रिज को भगवान राम के धनुष-बाण के आकार में बनाया गया है, जो निश्चित रूप से पर्यटकों को खूब पसंद आएगा।

झरने के ठीक ऊपर बना है ग्लास ब्रिज
भगवान श्रीराम की तपोभूमि कोदंड वन में जल प्रपात पर इस धनुषाकार ग्लास ब्रिज को तैयार किया गया है। इस ग्लास को रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के तुलसी (शबरी) जल प्रपात के ठीक ऊपर बनाया गया है। ग्लास ब्रिज पर चलते समय पर्यटकों को ऐसा महसूस होगा, मानों हवा पर चल रहे हैं। साथ ही पर्यटक झरने के पानी की कल-कल आवाज भी स्पष्ट रूप से सुन सकेंगे जो उनका रोमांच कई गुना बढ़ा देगा।
तुलसी जल प्रपात में पानी की 3 धाराएं चट्टानों पर 40 फीट की ऊंचाई से गिरकर जंगल में गायब हो जाती है। ग्लास ब्रिज से यह पूरा नजारा देखने को मिलेगा। मिली जानकारी के अनुसार ग्लास ब्रिज पर टहलने के लिए पर्यटकों को टिकट खरीदना पड़ेगा। इस जगह को इको-टूरिज्म क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
क्या हैं ग्लास ब्रिज की खासियतें
- दावा किया जाता है कि इस ग्लास ब्रिज को बिहार के राजगीर ग्लास ब्रिज के तर्ज पर बनाया गया है।
- उत्तर प्रदेश का पहला ग्लास ब्रिज है। इस ग्लास स्काई वाक ब्रिज का आकार धनुष और बाण की तरह है।
- चित्रकूट ग्लास स्काई वाक ब्रिज को बनाने में लगभग 3.70 करोड़ रुपए की लागत आयी है।
- धनुष और बाण, दोनों ही पूरी तरह से कांच से बने हैं। ग्लास ब्रिज का बाण खाई की ओर आगे बढ़ा हुआ है जिसकी लंबाई 25 मीटर और धनुष की चौड़ाई 35 मीटर है।
- बाण में 12 मीटर तक वुडेन टाइल्स लगे हैं और आगे की ओर 36 एमएम मोटा टफन ग्लास लगाया गया है।
- एक बार में इस ग्लास ब्रिज पर 25 लोग खड़े हो सकेंगे।
- ब्रिज की भार क्षमता प्रति वर्ग मीटर 500 किलो है।
- इस ग्लास ब्रिज से तुलसी जल प्रपात की तीनों जलधाराओं और जंगल का पूरा नजारा दिखाई देगा।

कब खुलेगा ग्लास ब्रिज
उत्तर प्रदेश के वन और पर्यटन विभाग की ओर से इस ग्लास स्काई वाक ब्रिज का निर्माण करवाया गया है। इस गाज़ीपुर की पवन सुत कंस्ट्रक्शन कंपनी ने तैयार किया है। चित्रकूट में जिस झरने पर इस ग्लास ब्रिज का निर्माण किया गया है, पहले उसे शबरी जल प्रपात कहा जाता था।
लेकिन पास ही में गोस्वामी तुलसीदास का जन्म स्थान होने की वजह से पिछले साल राज्य सरकार ने इसका नाम बदलकर तुलसी जल प्रपात कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि लोकसभा चुनावों के तुरंत बाद ही इस ग्लास ब्रिज को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।
इस ग्लास ब्रिज को इको टूरिज्म स्पॉट के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार पर्यटकों के लिए ग्लास ब्रिज पर आने और जाने का अलग-अलग मार्ग होगा। ब्रिज के आसपास के क्षेत्र के सुन्दरीकरण के लिए जानवरों की आकृति वाला घास का बागिचा, फव्वारा, टॉयलेट आदि की सुविधा दी जाएगी। ब्रिज के पास ही रॉक व हर्बल गार्डन और रेस्तरां बनाया जाएगा। ग्लास ब्रिज पर पर्यटकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए चेनलिंक वायर भी लगाया गया है।



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