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प्रयागराज के पास श्रृंगवेरपुर धाम को किया जा रहा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित

प्रयागराज शहर से महज 45 किमी की दूरी पर स्थिति है श्रृंगवेरपुर। यह प्रभु श्रीराम से जुड़े उन पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है, जिनका संबंध उनके वनवासकाल से रहा है। साल 2025 में प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ से पहले इसे क्षेत्र को तीर्थ स्थल घोषित करने की पूरी कोशिशें की जा रही है। इसके साथ ही श्रृंगवेरपुर के विकास कार्यों पर भी काफी खर्च किया जा रहा है।

श्रृंगवेरपुर को विकसित करने के साथ-साथ इनके सुन्दरीकरण पर भी काफी ध्यान दिया जा रहा है। बता दें, श्रृंगवेरपुर ही वह स्थान है जहां श्रीराम की भेंट मछुआरों के राजा निषादराज से हुई थी, जिन्होंने श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को अपनी नाव में बैठाकर गंगा पार करने में मदद की थी।

prayagraj nishadraj park

दो फेजों में हो रहा निषादराज पार्क का विकास

श्रृंगवेरपुर में सबसे खास जगह निषादराज पार्क को माना जाता है। श्रृंगवेरपुर के साथ-साथ करीब 10 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस पार्क का भी विकास किया जा रहा है। बताया जाता है कि गंगा नदी के किनारे स्थित श्रृंगवेरपुर धाम के कायाकल्प का काम लगभग 70 फीसदी पूरा किया जा चुका है। फव्वारे, विशाल द्वार, रामायण के प्रसंगों के चित्रण आदि से पार्क को सजाया गया है।

इसके अलावा प्रभु श्रीराम और निषादराज की गले मिलते हुए 51 फीट ऊंची कांस्य की प्रतिमा स्थापित की गयी है। यह मूर्ति राज्य के ललित कला अकादमी ने 470 लाख रुपए की लागत से बनवायी है। इस मूर्ति को निषादराज पार्क के निर्माण के पहले फेज के अंतर्गत किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पहले फेज के लिए राज्य सरकार की तरफ से 1313.16 लाख रुपए आवंटित की गयी है। दूसरे फेज में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए 1818.90 लाख रुपए स्वीकृत की गयी थी।

दो फेजों में निषादराज पार्क में श्रीराम-निषादराज की मूर्ति के अलावा जो विकास कार्य किये गये उनमें पैडेस्टल, पोडियम, ओवर हेड टैंक, चहारदीवारी, प्रवेश द्वार का निर्माण, गार्ड रूम, पाथ वे, कैफेटेरिया, केयरटेकर रूम, ध्यान केंद्र, टॉयलेट ब्लॉक, कियॉस्क, पार्किंग, हॉर्टीकल्चर, सोलर पैनल, मुक्तकाशी मंच आदि शामिल हैं।

स्थापित हुई श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और निषादराज की आदमकद मूर्ति

हाल ही में प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम में प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और निषादराज की आदमकद मूर्ति स्थापित की गयी है। श्रृंगवेरपुर धाम में लगायी जाने वाली सभी मूर्तियों के निर्माणकार्य की देखरेख की जिम्मेदारी इलाहबाद यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स विभाग के दो छात्रों उधम सिंह और अंकित सिंह ने संभाल रखी है।

बताया जाता है कि इसी टीम ने लगभग 4 महीनों की मेहनत से ये मूर्तियां तैयार की है। इसके साथ ही श्रृंगवेरपुर धाम में एक म्यूजियम और गैलरी भी बनायी जा रही है। गंगा नदी के पुराने घाट का सुन्दरीकरण करने के साथ-साथ यहां प्रकाश की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि लोग शाम को इस स्थान पर टहलने के लिए जा सकें।

श्रीराम के नाम के स्तंभ होंगे स्थापित

महाकुंभ अधिकारी विजय किरण आनंद के मीडिया को दिये गये बयान के मुताबिक श्रृंगवेरपुर धाम के इर्द-गिर्द ग्रीन बेल्ट तैयार किया जाएगा। इसके विकास का पहला फेज करीब 95% और दूसरे फेज का काम लगभग 60% पूरा हो चुका है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की तरफ से राम वन गमन पथ पर उनके नाम के स्तंभ स्थापित किये जा रहे हैं।

अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक कुल 290 स्तंभ स्थापित किये जाएंगे, जिसमें प्रयागराज भी शामिल हैं। इसके लिए में चार जगहें चुनी गयी हैं, जिसमें एक प्रतापगढ़ और दो कौशांबी में स्थित है। ये सभी स्तंभ राम वन गमन पथ पर स्थापित किये जाएंगे और केवल उन्हीं जगहों पर स्थापित होंगे जहां श्रीराम ने रात्रि को निवास किया था। राम वन गमन पथ श्रृंगवेरपुर से भी होकर गुजरता है, इसलिए यहां 1,100 करोड़ रुपए से गंगा नदी पर एक ब्रिज का निर्माण भी किया जाएगा।

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