बनारस में एक बार फिर से शुरू हो चुका है महादेव और माता गौरा का विवाह समारोह। बसंत पंचमी के दिन बाबा विश्वनाथ को तिलक चढ़ाया गया, जिसके बाद इस समारोह की शुरुआत हो गयी। मिली जानकारी के अनुसार धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए बाबा विश्वनाथ के तिलक समारोह का आयोजन किया गया।
इस मौके पर महादेव की पंचबदन रजत मूर्ति को सजा-धजा कर तैयार किया गया था। बाबा विश्वनाथ को आचार्यों द्वारा तिलक लगाया गया जिसके बाद चारों वेदों की ऋचाओं का आचार्यों द्वारा पाठ किया गया। इस मौके पर मुख्य यजमान के तौर पर कमिश्नर कौशल राज शर्मा भी मौजूद रहे।

पूरे विधि-विधान के साथ महादेव का अभिषेक किया गया, जिसके बाद तिलक समारोह सम्पन्न हुआ। बता दें, बसंत पंचमी के दिन बाबा विश्वनाथ के तिलक समारोह के साथ विवाह उत्सव की शुरुआत हो जाती है। इसके बाद महाशिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का विवाह होता है और रंगभरी एकादशी के दिन माता गौरा का गौना किया जाता है।
इसी परंपरा के आधार पर बनारस में बाबा विश्वनाथ के तिलक की विधि पूरी की। बताया जाता है कि शाम के समय शहनाई की मंगल ध्वनि के बीच महादेव को तिलक लगाया गया और उन्हें फलाहार का भोग लगाया गया। इसके साथ ही विवाह उत्सव की पहली विधि संपन्न हुई।
बाबा विश्वनाथ मंदिर में शुरू हुए विवाह उत्सव की एक विधि के तौर पर पूर्व महंत के टेढ़ीनीम स्थित आवास पर मौजूद महादेव की पंचबदन मूर्ति का भव्य श्रृंगार किया गया और सप्तऋषियों के प्रतीक 7 थालों में महादेव को तिलक की सामग्री चढ़ाई गयी। अहले सुबह मंगला आरती के साथ शुरू हुआ समारोह में देर रात तक मंगल गीत गूंजते रहे।
बसंत पंचमी के दिन जिस तरह महादेव की पंचबदन मूर्ति का श्रृंगार किया गया है, विवाह उत्सव की अन्य विधियों में भी बाबा विश्वनाथ को अलग-अलग तरह के वस्त्र धारण करवाएं जाते हैं। खास बात है कि ये सभी वस्त्र बाहर से नहीं बल्कि बनारसवासी खुद अपने हाथों से तैयार कर बड़े ही प्यार से महादेव को समर्पित करते हैं।



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