राजस्थान ऐसा राज्य है जिसके हर शहर में कोई ना कोई ऐतिहासिक किला बना हुआ है। लेकिन आज हम जिस किले की बात कर रहे हैं, वह ऐतिहासिक तो नहीं, लेकिन अपनी सुन्दरता से लोगों को मोह लेने वाला है। हम बात कर रहे हैं उदयपुर के पिछोला झील के बीचोबीच बने जल महल, ताज लेक पैलेस की।

राजा-महाराजाओं के जमाने से ही यह लेक पैलेस अपनी सुन्दरता और भव्यता की वजह से लोगों का ध्यान आकर्षित करता रहा है। जुलाई में जब मॉनसून अपने पूरे शबाब पर होता है तब उदयपुर में घूमने के लिए यह पैलेस बिल्कुल परफेक्ट लोकेशन होता है।
आइए आपको जल महल की भव्यता से रु-ब-रु करवाते हैं :
65 शानदार कमरें

वर्तमान समय में उदयपुर का जल महल एक 5 स्टार लग्जरी होटल 'ताज लेक पैलेस' बना दिया गया है। इस पैलेस में 65 से ज्यादा लग्जरी कमरें हैं। पूरे महल की सजावज काले और सफेद संगमरमर के पत्थरों और अर्द्ध कीमती पत्थरों से की गयी है। इसके अलावा महल के हर कमरे को शानदार शाही फर्नीचल, भित्तिचित्र, मेहराब और खिड़कियों पर रंगीन कांचों से सजाया गया है। पिछोला झील के बीच में बने इस जल महल में वॉटर फाउंटेन, विशाल खुला आंगन और स्तंभ हैं, जो इसकी सुन्दरता में चार चांद लगा देते हैं।
जल महल का इतिहास
ताज लेक पैलेस का निर्माण वर्ष 1746 में महाराजा जगत सिंह द्वितीय ने करवाया था। पिछोला झील के ठीक बीच में स्थित इस महल का निर्माण इस तरीके से किया गया था ताकि यहां से सूर्य प्रणाम किया जा सकें। एक लोककथा के अनुसार महाराजा जगत सिंह द्वितीय एक बार अपने पिता महाराणा संग्राम सिंह के पास एक फरियाद लेकर पहुंचे। वह अपने दोस्तों व महिला मित्रों के साथ समय बिताने के लिए उदयपुर के ही एक और लेक में बने जगमंदिर में रहने की अनुमति मांग रहे थे।

लेकिन उनके पिता ने उन्हें यह कहते हुए मना कर दिया कि अगर ऐसी जगह पर राजकुमार रहना चाहते हैं, तो वह खुद बनवाएं। यह बात जगत सिंह द्वितीय के दिल को लग गयी और उन्होंने इस जल महल का निर्माण करवाया। बता दें, पिछोला झील प्राकृतिक नहीं बल्कि एक मानवनिर्मित झील है जिसका निर्माण बंजारा जनजाति के सदस्य पिच्चु बंजारा ने किया था।
जुलाई में क्यों घूमे उदयपुर का जल महल

जुलाई में राजस्थान और खास तौर पर उदयपुर में घूमने की प्रमुख वजह मॉनसून है। दरअसल, राजस्थान एक कम वर्षा वाला राज्य है। इसलिए गर्मी के मौसम में यहां भयानक गर्मी पड़ती है जो कई बार सैलानियों के बर्दास्त की हद से बाहर चला जाता है। मॉनसून में जब बारिश होती है तो राजस्थान में तापमान थोड़ा कम होता है और गर्मी के समय में घूमना आसान हो जाता है। इसके अलावा उदयपुर झीलों का शहर कहलाता है। बारिश के समय झीलों के जलस्तर में वृद्धि होती है, जिससे इनकी खुबसूरती भी कई गुना बढ़ जाती है।
जल महल की एंट्री फीस और कैसे पहुंचे

यदि आप इस लग्जरी होटल में नहीं रुक सकते तब भी आप उदयपुर के जल महल को घूमकर देख तो सकते ही हैं। इस पैलेस का प्रवेश शुल्क 500 रुपये प्रति व्यक्ति है। यदि आपने नाव में पिछोला झील की सैर की तो उसके लिए आपको 450 रुपये प्रति व्यक्ति का शुल्क चुकाना पड़ेगा। इस सैर के दौरान आपको अरावली पहाड़ी का शानदार नजारा दिखेगा। पिछोला झील उदयपुर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से सिर्फ 3 किमी की दूरी पर है। उदयपुर एयरपोर्ट से पिछोला झील की दूरी 25 किमी है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको उदयपुर में बस, टैक्सी और रिक्शा आसानी से मिल जाएगा।



Click it and Unblock the Notifications














