वृंदावन के बांके बिहारी ठाकुर का मंदिर, जहां सामान्य दिनों में भी हजारों की संख्या में आने वाले भक्तों की लाइन लगी ही रहती है। अगर आप भी नवंबर में बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने के लिए जाने की योजना बना रहे हैं, तो ध्यान दें। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और आरती का समय बदलने वाला है।
आरती और दर्शन के समय में कल यानी 3 नवंबर से बदलाव होने वाले हैं। पर क्यों बांके बिहारी मंदिर में आरती और दर्शन का समय बदलने का फैसला लिया गया? क्या होगा बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और आरती का नया समय?

मथुरा के वृंदावन में स्थित श्री बांके बिहारी महाराज मंदिर में दर्शन और आरती के समय में 3 नवंबर से बदलाव किया जा रहा है। नित्य दर्शन और आरती के समय में बदलाव किया जा रहा है, जिसके बारे में मंदिर प्रबंधन की तरफ से जानकारी दे दी गयी है। मंदिर में श्री बांके बिहारी महाराज के दर्शन और आरती के समय में यह बदलाव मौसम के परिवर्तन की वजह से किया जा रहा है। दरअसल, शीतकाल में दिन छोटे होने की वजह से दर्शन के समय में बदलाव किया जा रहा है। यह बदलाव पूरे शीतकाल के दौरान ही लागू रहेगा।
क्या होगा बांके बिहारी मंदिर में दर्शन का नया समय?
वर्तमान में वृंदावन का श्री बांके बिहारी मंदिर सुबह 7.45 बजे से भक्तों के नित्य दर्शन के लिए खुल जाता है। दोपहर 12 बजे तक भक्त मंदिर में आकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर पाते हैं। इसके बाद मंदिर को कुछ समय के लिए बंद कर दिया जाता है। शाम को 5.30 बजे मंदिर फिर से खुलता है जो रात को 9.30 बजे तक खुला रहता है। इसके बाद शयन के लिए मंदिर को बंद कर दिया जाता है।
वहीं मंदिर में वर्तमान में श्रृंगार आरती सुबह 8 बजे और राजभोग आरती दिन में 11.55 बजे होती है। शयन आरती रात को 9.30 बजे की जाती है। लेकिन शीतकाल के लिए अब इस समय में बदलाव होने वाला है।

नित्य दर्शन और आरती का नया समय -
- मंदिर के पट खुलेंगे - सुबह 8.45 बजे (1 घंटा विलंब से)
- दोपहर में मंदिर के पट बंद होंगे - दोपहर 1 बजे (1 घंटा विलंब से)
- शाम को पट खुलेंगे - 4.30 बजे (1 घंटा जल्दी)
- रात को पट बंद होंगे - 8.30 बजे (1 घंटा जल्दी)
- श्रृंगार आरती का समय - सुबह 8.55 बजे
- राजभोग आरती - दोपहर 12.55 बजे
- शयनभोग आरती - 8.30 बजे
होंगे और भी कई परिवर्तन
शीतकालिन समय सारणी लागू होने के बाद बांके बिहारी मंदिर में सिर्फ आरती और दर्शन ही नहीं बल्कि और भी कई बदलाव किये जाते हैं। ठाकुरजी को सर्दियों से बचाने के लिए सुबह और शाम के समय गर्म कपड़े पहनाए जाएंगे। दिवाली के दिन से ही ठाकुरजी के भोग में मेवा जैसे काजू, पिस्ता, केसर आदि का इस्तेमाल शुरू हो जाता है। शयन के समय ठाकुरजी को रजाई ओढाई जाती है।
ठाकुरजी को ओढाने के लिए खासतौर पर जयपुरी रजाई मंगवाई जाती है। जब ठंड बढ़ती है तो रजाई के ऊपर कंबल भी डाल दिया जाता है। ठाकुरजी के बिस्तर पर पहले दरी, उसके ऊपर चादर और फिर गद्दा बिछाकर बिछौना लगाया जाता है। सर्दियों के मौसम में ठाकुरजी के लिए फूलों का प्रयोग कम कर दिया जाता है। बाल भोग में उन्हें गर्म हलुवा और केसर वाला दूध दिया जाता है। अब ठंडई नहीं दी जाएगी।



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