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राम मंदिर के उद्धाटन के लिए अयोध्या कब आएंगे PM मोदी? कितना भव्य सजा है रामलला का दरबार!

अयोध्या में रामलला का भव्य दरबार। राम मंदिर... जिसका सपना पिछले लंबे समय से लोगों की आंखों में बसा हुआ था, वह अब पूरा होने ही वाला है। अगले साल जनवरी के तीसरे सप्ताह में राम मंदिर का उद्धाटन हो सकता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जनवरी 2024 में मुहूर्त की कुछ तिथियां भेज दी गयी हैं।

Fact about ram mandir

भेजी गयी तिथियों की पुष्टि प्रधानमंत्री द्वारा होने के बाद ही राम मंदिर के उद्धाटन का दिन निश्चित हो पाएगा। राम मंदिर के उद्धाटन के लिए प्रधानमंत्री कब अयोध्या आएंगे? कितना भव्य सजाया गया है राम मंदिर का दरबार? कितना शानदार बन रहा है राम मंदिर?

चलिए आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं :

अयोध्या में रामलला के मंदिर के उद्धाटन के लिए 3 तिथियों का चयन किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अंतर्राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरी ने शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम से मिलने के बाद बताया कि जनवरी 2024 के तीसरे सप्ताह में राम मंदिर का उद्धाटन हो जाएगा। उन्होंने बताया कि 21 से 23 जनवरी के बीच किसी दिन राम मंदिर के उद्धाटन के लिए निश्चित किया जाएगा।

मुहूर्त की तिथियां प्रधानमंत्री को भेज दी गयी हैं और वहीं उद्धाटन की तिथि निर्धारित करेंगे ताकि उद्धाटन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार पीएम मोदी 22 जनवरी को रामनगरी आ सकते हैं जिसके बाद मंदिर में रामलला समेत अन्य मूर्तियां स्थापित की जाएंगी।

बता दें, राम मंदिर का संपूर्ण निर्माण कार्य 2025 में पूरा होगा। अभी तक मंदिर के भूतल का 80% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। 2024 के जनवरी में मंदिर के गर्भगृह में रामलला की मूर्तियों में प्राणप्रतिष्ठा होगी। इसके बाद मंदिर के कपाट को भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा।

काफी रिसर्च के बाद बन रहा है मंदिर

अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण काफी रिसर्च के बाद ही शुरू किया गया है। 9 नवंबर 2019 को जब सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में अपना फैसला सुनाया उसके बाद 5 अगस्त 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की नींव रखी। इस मंदिर का निर्माण 107 एकड़ के क्षेत्र में किया जा रहा है। इस मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया जा रहा है कि सूर्य की पहली किरण गर्भगृह में स्थापित प्रभु श्रीराम की मूर्ति पर ही पड़े। मंदिर के निर्माण के साथ-साथ मंदिर में भक्तों के लिए सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।

नींव में लोहे के सरिया का इस्तेमाल नहीं

मिली जानकारी के अनुसार रामजन्म भूमि में निर्माणाधिन भव्य मंदिर को इस प्रकार से तैयार किया जा रहा है कि यह कम से कम 1000 सालों तक सुरक्षित रह सकें। बताया जाता है कि मंदिर की नींव जमीन से 40 फुट की गहराई में खोदी गयी है। मंदिर के नींव में किसी भी प्रकार के लोहे के सरिया का इस्तेमाल नहीं किया गया है। मंदिर के निर्माण के लिए ग्रेनाइट पत्थरों का प्रयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, जिन जगहों पर ईंटों का इस्तेमाल हो रहा है, प्रत्येक ईंट पर प्रभु श्रीराम का नाम छपा हुआ है।

शालीग्राम शिलाओं से बन रही हैं मूर्तियां

मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम और माता जानकी की जो मूर्तियां स्थापित की जाएंगी, उनका निर्माण शालीग्राम शिला से किया जा रहा है। इन शिलाओं को नेपाल के गंडकी नदी से अयोध्या में मंगवाया गया है। साल 2023 में 26 जनवरी की तड़के गंडकी नदी से इन शिलाओं को ट्रकों पर लादकर सड़कमार्ग से ही अयोध्या लाया गया। हिंदू धर्म में शालीग्राम शिलाओं का काफी अधिक महत्व है।

कहा जाता है कि ये शिलाएं भगवान विष्णु का प्रतिक होती हैं। ये शिलाएं एक प्रकार का जीवाश्म होती हैं, जो आज के समय में विलुप्तप्राय हो चुकी हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता तुलसी, जो लक्ष्मी का स्वरुप मानी जाती हैं, ने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दिया था। इसलिए भगवान विष्णु शालीग्राम शिला में ही परिवर्तित हो गये थे।

राम मंदिर की अन्य विशेषताएं

  • तीन तल में बन रहे राम मंदिर की लंबाई लगभग 268 फीट, चौड़ाई 140 फीट और ऊंचाई 161 फीट होगी। इस मंदिर में 5 मंडप होंगे, अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंगमंडप और गर्भगृह।
  • राम मंदिर के तीनों तल में कुल 366 खंभे होंगे। पहले यानी भूतल में 160 खंडे, दूसरे में 132 खंभे और तीसरे तल में 74 खंभे होंगे। प्रत्येक खंभे में 16 मूर्तियां बनायी जाएंगी। वर्तमान समय में पहले तल यानी भूतल का निर्माण 80% पूरा हो चुका है।
  • मंदिर के पहले तल में रामलला का दरबार होगा। इसमें भगवान राम, माता सीता, तीनों भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न तथा परम भक्त हनुमान के साथ विराजमान होंगे।
  • गर्भगृह के चारों तरफ परिक्रमा पथ होगा, जो 10 फीट चौड़ा होगा।
  • रामकथा कुंज में पूरे दिन राम कथा का प्रवचन चलता रहेगा। यहां भगवान राम के जीवन को दर्शाती लगभग 125 मूर्तियां भी होंगी।
  • मंदिर में चार प्रवेश द्वार होंगे जिसमें से पहला यानी मुख्य प्रवेश द्वार राजा दशरथ के महल की ओर से होगा।

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