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सावन में दिल्ली के आसपास इन मंदिरों में एक बार जरूर लगाएं 'हर हर महादेव' का नारा

यूं तो हर रोज ही लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं लेकिन सावन का महीना शिवभक्तों के लिए काफी खास होता है। इस साल लंबे अर्से बाद ऐसा हो रहा है जब सावन के दो महीने यानी 8 सोमवार मिलेंगे जब भक्त अपने आराध्य की पूजा करेंगे। अगर आप दिल्ली में रहते हैं और किसी ऐसे मंदिर में जाकर भोलेनाथ की पूजा करना चाहते हैं जिसका पौराणिक महत्व भी हो, तो यह आर्टिकल आपके काम का है।

lord shiva

हम आपको दिल्ली व आसपास के इलाकों के कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जहां दूर-दूर के इलाकों से भक्त महादेव की पूजा करने आते हैं। इन मंदिरों के आसपास आपको धूप-अगरबत्ति और भगवान को अर्पण होने वाले नैवैद्य की खूशबू दूर से ही मिलने लगेगी। पूरा वातावरण भोलेनाथ के रंग में रंग जाएगा और आप बरबस ही बोल पड़ेंगे, 'हर हर महादेव'।

दुधेश्वरनाथ मंदिर

दिल्ली एनसीआर के गाजियाबाद में स्थित दुधेश्वरनाथ मंदिर की वास्तुकला भी दुध जैसे सफेद ही है। हिंडन नदी के किनारे इस मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू या खुद ही जल से प्रकट हुआ बताया जाता है। मान्यता है कि दुधेश्वरनाथ अपने जिस भक्त पर प्रसन्न होते हैं, उसे प्रचुर मात्रा में सोना मिलती है। कहा जाता है कि रावण को भी दुधेश्वरनाथ की कृपा से ही सोने की लंका मिली थी।

Dudheshwar nath temple

कहा जाता है कि औरंगजेब के कब्जे से भाग निकलने के बाद वीर मराठा छत्रपति शिवाजी ने इस मंदिर में हवन-पूजन किया और उसके बाद ही वह मुगलों की सेना पर कूच करने गये। दुधेश्वरनाथ महादेव से शिवाजी इतने प्रभावित हुए कि राजतिलक के बाद उन्होंने महाराष्ट्र में भी एक गांव बसाया जिसका नाम दुधेश्वर ग्राम रखा गया। उन्होंने इस मंदिर का जीर्णोद्धार भी करवाया। इस मंदिर का शिवलिंग 5000 साल पुराना बताया जाता है।

गौरी शंकर मंदिर

दिल्ली में स्थित यह मंदिर लगभग 800 साल पुरानी बतायी जाती है। इस मंदिर में भगवान शिव अर्धनारीश्वर के रूप में हैं। जानकारों के मुताबिक साल 1761 में मराठा सैनिक आपा गंगाधर ने इस मंदिर के भवन का निर्माण करवाया था। अगर आप इस मंदिर में जाते हैं, तो छत पर मौजूद पिरामिड के नीचले हिस्से में आज भी उनका नाम दिखायी देगा।

Gauri shankar temple

सावन के महीने में इस मंदिर में आने वाले कांवड़ियों को भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य गणेश के मूर्ति स्वरूप की पूजा करने का मौका मिलता है। इस मंदिर में 5 पीपल के पेड़ों के बीच महादेव का शिवलिंग स्थापित है। इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर शैव संप्रदाय का प्रतिक है। यह मंदिर पुरानी दिल्ली के सबसे चर्चित मंदिरों में से एक है।

नीली छतरी मंदिर

दिल्ली के निगम बोध घाट के पास जमुना बाजार में नीली छतरी मंदिर है। कहा जाता है कि इस मंदिर में महादेव के शिवलिंग की स्थापना पांडवों के सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर ने की थी। इसी मंदिर में अश्वमेध यज्ञ करने के बाद युधिष्ठिर चक्रवर्ती सम्राट बने थे। इस मंदिर के गुंबज पर नीले रंग के टाईल्स की वजह से इसे नीली छतरी वाला मंदिर कहा जाता है।

Neeli chhatri wale

लेकिन एक लोककथा यह भी है कि पुराने जमाने में इस मंदिर के गुंबज में नीलम पत्थर जड़ा हुआ था। इस वजह से ही इस मंदिर को नीली छतरी वाला मंदिर कहा जाता था। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां महादेव को 5 लड्डुओं का भोग लगाने वाले को उसकी मनचाही मुराद जरूर मिलती है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 5500 साल पुराना बताया जाता है।

मंगल महादेव बिड़ला कानन

Mangal Mahadev birla kanan

महादेव के इस मंदिर का निर्माण 90 के दशक में हुआ था। इस मंदिर भगवान शिव की करीब 100 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में कई और भी देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं जिनमें माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी, सीता राम, राधा कृष्ण और गणपति शामिल हैं। यह मंदिर रंगपुरी में स्थित है। मंदिर से सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन एयरो सिटी मेट्रो स्टेशन है। मंदिर के दोनों और बागिचा है जिनसे होते हुए ही इस मंदिर तक पहुंचने का मनमोहक रास्ता है। इस मंदिर में मन को बेहद सुकून मिलता है।

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