पिछले काफी दिनों से प्रयागराज जाने वाली सभी उड़ानों का अत्यधिक किराया लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ था। लेकिन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू के एक बयान ने उन लाखों श्रद्धालुओं के चेहरे पर मुस्कुराहट ला दी है, जो प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले में स्नान के लिए जाने की योजना बना रहे हैं।
एक मीडिया चैनल को दिये इंटरव्यू के दौरान केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की है कि प्रयागराज जाने वाली विमानों के किराए में 50 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि नया किराया संरचना आज यानी 1 फरवरी से ही लागू कर दी जाएगी।

बता दें, केंद्रीय मंत्री ने यह घोषणा विमान के किराए के मुद्दे पर ही एयरलाइंस कंपनियों के साथ सरकार की 3 बैठकों के बाद की है। मीडिया रिपोर्ट में बताया जाता है कि इस बैठकर में एयरलाइंस कंपनियों को एक बार फिर से यह समझाया गया कि महाकुंभ मेला जैसा भव्य आयोजन 144 सालों में एक बार हो रहा है। इसलिए इसके महत्व को ध्यान में रखते हुए किराए में संशोधन करने की जरूरत है।
13 जनवरी से प्रयागराज के संगम तट पर शुरू हुआ महाकुंभ मेला 26 फरवरी तक चलने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 19.94 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। और अभी भी देश व विदेशों से तीर्थ यात्रियों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। Hindustan Times की रिपोर्ट में बताया जाता है कि केंद्रीय मंत्री ने NDTV को दिये एक इंटरव्यू में एयरलाइंस कंपनियों को यह भी आश्वस्त किया कि किराया घटाने की वजह से एयरलाइंस कंपनियों को कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 23 जनवरी को एयरलाइंस कंपनियों के साथ बैठक करने के बाद DGCA ने सभी एयरलाइंस कंपनियों को हिदायत दी थी कि वे प्रयागराज के लिए विमान के किरायों पर अपनी नजरें बनाएं रखें और उन्हें सामान्य बनाने की कोशिश करें। बताया जाता है कि जनवरी में हुई इस बैठक के बाद प्रयागराज के लिए उड़ानों की मांग को ध्यान में रखते हुए 81 अतिरिक्त उड़ानों को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही प्रयागराज के लिए उड़ानों की संख्या बढ़कर 132 हो गयी।
हालांकि दावा किया जा रहा है कि इसके बावजूद दिल्ली से प्रयागराज के उड़ान का किराया लगभग 21 गुना बढ़ गया। लगभग 4000 हेक्टेयर के क्षेत्र में महाकुंभ मेले का आयोजन किया जा रहा है जिसका आकार करीब 7,500 फुटबॉल मैदानों के बराबर है। संगम तट पर 15,0000 टेंट बनाए गये हैं, ताकि इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के रहने की व्यवस्था की जा सकें। इसके साथ ही उनके खाने-पीने के लिए भंडारा, बायो टॉयलेट, दवाई व आपातकालिन इलाज आदि की व्यवस्था भी की गयी है।



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