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मुन्नार,अलेप्पी ही नहीं कोट्टयम् भी केरल का खूबसूरत हिल स्टेशन

Written By: Goldi

कोट्टयम्, केरल का एक प्राचीन शहर है। यह कोट्टयम् जिले में ही स्थित है जो भगवान की स्‍वंय की भूमि पर बने जिलों में से एक है। कोट्टयम् को अपना नाम शब्‍द कोट्ट से मिला जो एक मलयालम शब्‍द है जिसका अर्थ होता है "किला" और अकम शब्‍द का अर्थ होता "भीतर या अंदर", जो मिलकर शाब्दिक अर्थ बनाते है "किले के अंदर"।

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अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध विरासत के कारण कोट्टयम् एक लोकप्रिय पर्यटन स्‍थल भी है। साल भर में हजारों पर्यटक यहां आराम करने आते हैं और केरल के भव्‍य सास्‍ंकृतिक मूल्‍यों का अनुभव करते हैं। पुंजार महल, केरल की समृद्ध विरासत का उदाहरण है। थिरूंक्‍कारा महादेव मंदिर, पल्‍लीप्‍पराथू कावू, थिरूवेरपू मंदिर और सरस्‍वती मंदिर, कोट्टयम् के निकट स्थित कुछ प्रसिद्ध मंदिर हैं।

राजसी ठाठ का एहसास करता केसरोली किला

केरल के दक्षिण में बसा यह शहर बैकवॉटर्स में दिलचस्पी रखने वालों को साल भर लुभाता है। वेम्बनाड झील कोट्टायम में नहरों और नदियों की विस्तृत श्रृंखला है जो वेम्बनाड झील में आकर मिलती हैं और उसके जल का विस्तार कराती हैं। यह झील बेकवाटर पर्यटन के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। यहां बोटिंग, फिशिंग और साइटसीइंग के अनुभवों का आनंद भी लिया जा सकता है। हजारो की संख्या में यहां हमेशा देशी विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।

इलावीझापुनचिरा

इलावीझापुनचिरा

इलावीझापुनचिरा, पर्यटकों के बीच स्थित प्रसिद्ध एक सुंदर पिकनिक स्‍पॉट है। यह छोटी पहाड़ी की गोद में फैली है जो इसे और भी आकर्षक बना देती है। यह समुद्र स्‍तर से 3200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह जगह ट्रैकर्स के बीच भी पसंदीदा है। शटर बग को पसंद करने वाले भी यहां आ सकते है और इस पहाड़ी से उगते सूरज और ढ़लते सूरज का सबसे खूबसूरत दृश्‍य देख सकते है।

थिरूनक्‍करा महादेव मंदिर

थिरूनक्‍करा महादेव मंदिर

भगवान महादेव को समर्पित है जिसे 16 वीं शताब्‍दी के शुरूआत में राजा थेक्‍कूमकुर के द्वारा बनवाया गया था। यह कोयट्टम् के मुख्‍य शहर में स्थित है। यह मंदिर केरल शैली में बना हुआ है। इस मंदिर का कुथामबलम अपनी डिजायन के लिए प्रसिद्ध है।

कुमाराकोम

कुमाराकोम

कोट्टायम के पास कुमाराकोम भी एक आकर्षक जगह है। यह जगह वंबनाड लेक के पास है और प्रवासी पक्षियों के लिए मशहूर है। आप चाहें, तो यहां से बैकवॉटर क्रूज की सैर के लिए भी निकल सकते हैं। कोट्टायम से 40 किलोमीटर दूर एक और बड़ा व मशहूर शिव मंदिर है। वायकोम मंदिर को परशुराम से जुड़ा बताया जाता है। यह मंदिर भी केरल के मंदिर कल्चर को करीब से दिखाता है और वाकई देखने लायक है।

पुंजार पैलेस

पुंजार पैलेस

पुंजार पैलेस, पुंजार में कोट्टायम से पाला - इराट्टुपेट्टा मार्ग पर स्थित है। यह महल, केरल की समृद्ध विरासत का सबूत है। इस महल में शाही प्राचीन वस्‍तुएं, खूबसूरत मूर्तियां और पत्‍थरों पर बनी लैम्‍प आदि आज भी मौजूद हैं। आप यहां सुंदर फर्नीचर भी देख सकते हैं जिनमें द्रोनी या ट्रीटमेंट बेड़ और एक पालकी भी शामिल है।

सेंट मेरी ऑर्थोडॉक्स चर्च

सेंट मेरी ऑर्थोडॉक्स चर्च

सेंट मेरी ऑर्थोडॉक्स चर्च, कोट्टायम जिले से दो किलोमीटर दूर एक बेहद खूबसूरत चर्च है। यदि आप इस चर्च को ध्यान से देखें तो आपको मिलेगा कि जहां इस चर्च में केरल के प्राचीन वास्तु को दर्शाया गया है तो वहीँ दूसरी तरफ इसमें पुर्तगाली वास्तु का भी भरपूर इस्तेमाल हुआ है। इस चर्च की दीवारों पर आलिशान नक्काशी की गयी है मोह लेगी, ज्यादतर में बाइबल की कहानियों को दर्शाया गया है।

वेम्बनाड झील

वेम्बनाड झील

वेम्बनाड झील या वेम्बनाड कयाल, जिस पर कुमारकोम द्वीपों के समूह के रूप में स्थित है, अपनी सुरम्य आकर्षक और प्राचीन जल क्षेत्रों द्वारा पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह केरल की सबसे बड़ी और देश की सबसे लम्बी झील है। यह झील पूरे जिले के पार फैली है और पुन्नामुडा कयाल और कोच्चि झील के नाम से भी जानी जाती है। दुनिया भर में झील, इसपर ओणम के दौरान आयोजित होने वाली वार्षिक नौकादौड़ (नेहरू ट्रॉफी बोट रेस) के लिये प्रसिद्ध है।

कब जाएं

कब जाएं

जाने का बेस्ट टाइम अगस्त से मार्च के बीच है। यहां हल्की ठंड भी होती है, इसलिए अपने साथ हल्की स्वेटर व शॉल जरूर लेकर चलें।

क्या खरीदें

क्या खरीदें

केरल के अन्य हिस्सों की तरह ही कोट्टायम में मसालों की खूब खेती होती है, इसलिए इन्हें आप सही दामों में यहां से खरीद सकते हैं। इसके अलावा, इको-फ्रेंडली रबर प्रॉडक्ट्स खरीदना भी ना भूलें।

कैसे पहुंचें

कैसे पहुंचें

कोट्टयम्, केरल के सभी टाउन और शहरों से अच्‍छी तरह जुड़ा हुआ है। यहां तक हवाई मार्ग, रेल मार्ग, सड़क मार्ग और अंदरूनी जल मार्ग से भी पहुंच सकते हैं।
कोट्टायम से नजदीकी एयरपोर्ट कोच्चि का है, जहां से इसकी दूरी 80 किमी है।

ट्रेन द्वारा
यह रेल मार्ग से तमाम शहरों से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, यहां पहुंचने के लिए बोट व फेरी भी ली जा सकती हैं। गौरतलब है कि कोट्टायम पहुंचने का यह तरीका टूरिस्ट्स का फेवरिट है।

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