पिछले सोमवार (18 नवंबर) को दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक खराब रहा। सोमवार को दिल्ली में वायु की गुणवत्ता का औसत सूचकांक (AQI) 495 पर पहुंच गया जो इस सीजन में सबसे ज्यादा रहा। प्रदूषण से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूरी दिल्ली में सख्ती के साथ ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्सशन प्लान (GRAP) 4 को लागू करने की हिदायत दी है ताकि AQI को नियंत्रण में लाया जा सकें। लेकिन दिल्ली के प्रदूषण को लेकर विशेषज्ञों की राय कुछ और ही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक AQI के स्तर में सुधार की संभावना नहीं है और 19 से 22 नवंबर के बीच दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर 'अत्यधिक गंभीर' (Severe) ही बना रहेगा। इसके अगले 6 दिनों तक दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर अत्यधिक गंभीर से बहुत खराब के बीच ही बने रहने की संभावना है। प्रदूषण को फैलने से रोकने की दिशा में भी मौसम का प्रतिकूल प्रभाव बना रह सकता है।

बात अगर राष्ट्रीय राजधानी में कोहरे या Smog की करें तो पिछले लगभग 1 नवंबर से ही दिल्ली को कोहरे की मोटी परत ने अपनी चपेट में ले रखा है। ऐसी स्थिति पूरे दिन बनी रहती है जिस वजह से अधिकतम तापमान के साथ-साथ न्यूनतम तापमान में भी काफी गिरावट दर्ज की गयी है।
इसकी क्या वजह है?
दिल्ली में इस तरह का मौसम या परिस्थिति बनने की मुख्य वजह मौसम है। हवा की अच्छी रफ्तार और पूर्वी हवा दिल्ली के AQI के बढ़ने के लिए जिम्मेदार मानी जाती है। मौसम की परिस्थितियां ही प्रदूषण को फैलाने वाले कारकों के परिवहन और निष्कासन को नियंत्रित करती है। प्रदूषण के उत्पन्न होने वाले कारकों के साथ ही मौसम PM 2.5 कणों के घंटों से लेकर वार्षिक रूप से परिवर्तन को नियंत्रित करते हैं।
वायुमंडलीय ठहराव, जिसमें बारिश का कम होना, सतही हवाओं का कमजोर होना आदि शामिल है, की वजह से सतह के पास प्रदूषण के निर्माण में मददगार साबित होती हैं। अगर प्रदूषण के कारकों के उत्सर्जन में वृद्धि न भी हो, लेकिन वायुमंडलीय ठहराव PM 2.5 कणों कणों को बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।
दिल्ली में आमतौर पर सर्वाधिक AQI दिवाली के आसपास के समय बढ़ जाता है। इसके बढ़ने में उस समय पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा के खेतों में पराली जलाने का भी सहयोग रहता है। लेकिन इस साल दिल्ली-NCR में हवा की अच्छी रफ्तार होने की वजह से दिवाली के समय प्रदूषण के स्तर में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गयी। इसके बाद हवा ने अपना रुख बदला और उत्तर-पश्चिम दिशा के बदले पूर्वी या दक्षिणी दिशा की ओर सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों की तरफ बहने लगी जिसकी वजह से प्रदूषित हवाएं पाकिस्तान की ओर चली गयी।

हालांकि बाद में मौसम की स्थितियां भी बदल गयी। इस साल उत्तरपश्चिमी मैदानी इलाकों में स्मॉग (Smog) भी समय से पहले ही छाने लगा।
मैदानी इलाकों पर लगातार पूर्वी हवाओं के बहने के कारण नमी का स्तर बढ़ गया। इसके बाद एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ ने दस्तक दी, जिसकी वजह से हवा में नमी बरकरार रही। इस पश्चिमी विक्षोभ के चले जाने के बाद आसमान साफ हो गया और उत्तर-पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से ठंड बढ़ गयी और पारे में गिरावट दर्ज की गयी। यह पूरी प्रक्रिया जब हवा में नमी के बरकरार रहते हुए होती है तो उससे उत्तरपश्चिम भारत के उत्तरपश्चिमी मैदानों में कोहरा बनता है। 17 नवंबर की शाम को हवा थोड़ी तेज बही जिससे पूरे दिल्ली-NCR क्षेत्र में कोहरा छा गया और उसके बाद यह शांत हो गया।
इस बारे में स्काईमेट वेदर, मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने बताया, "हम उत्तरी मैदानी इलाकों में आमतौर पर ऐसी कोहरे वाली परिस्थिति नवंबर के अंत या दिसंबर के शुरुआत में देखते हैं। इस साल मौसम के शुरुआती दिनों में पहले पूर्वी हवाएं और बाद में पश्चिमी विक्षोभ के कारण, हालांकि यह कमजोर ही था, नियमित अंतराल पर मैदानी इलाकों में नमी पहुंचता रहा। इससे कोहरा बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा हुई।"



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