देश के सबसे चर्चित गार्डन्स में से एक मुगल गार्डन का नाम बदलकर उसे एक नयी पहचान दी गयी है। देश की आजादी के 75 साल पुरे होने के मौके पर मनाये गये आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन को 'अमृत उद्यान' का नया नाम दिया गया है।

100 साल से भी ज्यादा पुराना यह गार्डन इस साल 29 जनवरी से 31 मार्च तक आम लोगों के लिए खोला गया था। लेकिन इसे एक बार फिर से लोगों के लिए खोलने का फैसला लिया गया है। 16 अगस्त से अमृत उद्यान के दरवाजों को आम लोगों के लिए खोल दिये गये हैं। लेकिन क्या आपको पता है जिस समय अमृत उद्यान को बनाया गया था, तब यहां आम लोगों को प्रवेश नहीं करने दिया जाता था। किसने और कब सबसे पहले अमृत उद्यान के दरवाजे आम नागरिकों के लिए खोले थे?
किसने बनाया था अमृत उद्यान

सबसे पहले हम आपको अमृत उद्यान यानी मुगल गार्डन का इतिहास बताते हैं। बात आजादी से पहले की है। साल 1911 में जब अंग्रेजी सरकार ने अपनी राजधानी कोलकाता (तत्कालिन कलकत्ता) से दिल्ली शिफ्ट करने का फैसला लिया तो रायसेना हिल्स को काटकर वहां पर वायसराय हाउस का निर्माण करवाया गया। इसे बनाने के लिए खासतौर पर इंग्लैंड से ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लूटियंस को बुलाया गया। सर लुटियंस ने 1917 में वायसराय हाउस बनाने का काम शुरू किया। वायसराय हाउस की सुन्दरता को बढ़ाने के लिए यहां एक बगीचा बनाने का फैसला लिया गया। बताया जाता है कि 1928 से 1929 तक यहां पेड़ों को रोपने का काम चला।
क्यों नाम पड़ा मुगल गार्डन

16वीं शताब्दी में बाबर के बाद से दिल्ली पर मुगलों की हुकूमत कायम रही। इस दौरान हुमायूं, अकबर, शाहजहां और औरंगजेब समेत और भी बादशाहों ने देशभर में कई बगिचों का निर्माण करवाया। बताया जाता है कि मुगलों ने सिर्फ दिल्ली में ही 1000 से ज्यादा बगिचे बनवाएं थे। मुगल गार्डन का डिजाइन ताजमहल और जम्मू-कश्मीर के बगिचों के डिजाइन से प्रेरित होकर ही तैयार किया गया था। इसलिए अंग्रेजों ने इसका नाम मुगल गार्डन रखने का फैसला लिया। बता दें, ब्रिटिशकाल में मुगल गार्डन में अंग्रेज शासक सिर्फ अपने मेहमानों को ही सैर करवाने के लिए ले जाते थे। तब किसी भी आम जनता को इसका दीदार नसीब नहीं होता था।
किसने पहली बार आम जनता के लिए खोले दरवाजे

भारत की आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान स्थापित हुआ और डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने। इस समय वायसराय हाउस का नाम बदलकर राष्ट्रपति भवन कर दिया गया। आजादी के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आम जनता के लिए अमृत उद्यान यानी मुगल गार्डन के दरवाजे खोल दिये। तब से लेकर आज तक हर साल वसंत ऋतु में इस गार्डन को आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है। इस साल भी 29 जनवरी से 31 मार्च 2023 तक अमृत उद्यान को आम लोगों के लिए खोला गया था।
क्या है अमृत उद्यान की खासियतें
- अमृत उद्यान करीब 15 एकड़ में फैला हुआ विशाल बगिचा है।
- खासतौर पर इसे देखने के लिए हर साल सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग दिल्ली पहुंचते हैं।
- अमृत उद्यान में लगभग 159 प्रकार के गुलाब और 10,000 से भी अधिक ट्यूलिप की प्रजातियां हैं।
- गुलाबों के नाम कई लोकप्रिय शख्सियतों जैसे मदर टेरेसा, अब्राहम लिंकन, जवाहर आदि के नामों पर रखा गया है।
- पूरे उद्यान में 70 विभिन्न प्रजातियों के 5,000 मौसमी फूल भी खिलते हैं।
पहली बार साल में दूसरी बार खोला गया उद्यान

अमृत उद्यान को 16 अगस्त को फिर से खोला गया है। ऐसा संभवतः पहली बार हुआ है जब राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान को आम जनता के लिए साल में दूसरी बार खोला गया है। भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इसलिए अमृत उद्यान को 16 अगस्त से 17 सितंबर तक खुला रखने का निर्णय लिया गया है। इसकी टिकट को आप visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर जाकर ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। इसके साथ-साथ ऑनस्पॉट टिकट बुकिंग कियॉस्क की मौजूद हैं, जहां से आप टिकट बुक कर सकते हैं। याद रखें, ऑनलाइन बुकिंग के लिए आपको अपने विजीट डे से करीब 10 दिनों पहले टिकट की बुकिंग करनी होगी। अमृत उद्यान में एंट्री सुबह 10 बजे से शाम को 4 बजे तक हो सकती है।



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