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लेह जाना बच्चों का खेल नहीं है, जिगर बड़ा और मज़बूत होना चाहिए..!!!

लेह शहर इंडस नदी के किनारे कराकोरम और हिमालय की श्रृंखला के बीच स्थित है। इस जगह की प्राकृतिक सुन्दरता देश भर से पर्यटकों को साल के बारहों महीने अपनी ओर खींचती है। इस शहर में ज़्यादातर हिस्से में मस्जि

By Belal Jafri

लेह शहर इंडस नदी के किनारे कराकोरम और हिमालय की श्रृंखला के बीच स्थित है। इस जगह की प्राकृतिक सुन्दरता देश भर से पर्यटकों को साल के बारहों महीने अपनी ओर खींचती है। इस शहर में ज़्यादातर हिस्से में मस्जिद और बौद्ध स्मारक हैं जो सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में बनाये गए थे। एक बहुत पुराना, नामग्याल डायनेस्टी का राजा सेंग्गे नामग्याल का नौ मंजिल का महल, इस जगह का मुख्य आकर्षण है जो मेडिएवल ऐरा के वास्तुशिल्पीय ढंग को दर्शाता है।

लेह की आबादी का ज़्यादातर हिस्सा बुद्ध मौंक, हिन्दुओं और लामाओं का है। कई अध्ययन केंद्र जैसे शांति स्तूप और शंकर गोम्पा इस जगह के आकर्षण को बढ़ाते हैं। इन कुछ सालों में लेह, मध्य एशिया में व्यापार केंद्र के नज़रिए से बढ़ा है और कई स्वयं प्रेरित और समर्पित लोगों को व्यापार का सुअवसर दिया है।

तो आइए जानें लेह की यात्रा पर क्या क्या कर सकते हैं आप।

कैसे पहुंचें लेह

कैसे पहुंचें लेह

लेह से दिल्ली, श्रीनगर और जम्मू लौटने के लिए लगातार हवाई सेवा उपलब्ध हैं। दिल्ली का हवाई अड्डा भारत और अन्य देशों के हवाई अड्डों से पहुँचने योग्य है। हवाई अड्डे से किराये पर टैक्सी लेकर भी लेह पहुंचसकते हैं । जो पर्यटक रेल से सफर करना चाहते हैं, जम्मू रेलवे स्टेशन नज़दीकी है और यह लेह से करीबन 736 किलोमीटर कि दूरी पर स्थित है। इसके अलावा आप बस द्वारा भी लेह की यात्रा कर सकते हैं।

हेमिस मठ

हेमिस मठ

हेमिस मठ, जम्‍मू कश्‍मीर में लेह के दक्षिण-पूर्व दिशा में शहर से 45 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह मठ शहर का मुख्‍य आकर्षण है जिसका निर्माण 1630 ई. में सबसे पहले स्‍टेग्‍संग रास्‍पा नंवाग ग्‍यात्‍सो ने करवाया था। 1972 में राजा सेंज नामपार ग्‍वालवा ने मठ का पुर्ननिर्माण करवाया और एक धार्मिक स्‍कूल का निर्माण किया जिसमें तंत्र विद्या को सिखाया जाता था। यह धार्मिक स्‍कूल धर्म की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य स्‍थापित किया गया था। हेमिस मठ तिब्‍बती स्‍थापत्‍य शैली में बना हुआ है जो बौद्ध जीवन और संस्‍कृति को प्रदर्शित करता है।

लेह पैलेस

लेह पैलेस

लेह पैलेस राजा सेंगे नामग्याल द्वारा 17 वीं सदी में बनाया गया था। महल की इमारत ल्हासा में पोताला पैलेस, जो की तिब्बत में है, की तरह है। जब डोगरा के बलों ने ,19 वीं सदी में लद्दाख पर कब्ज़ा कर लिया था, तब शाही परिवार को महल छोड़ना पड़ा था और उन्हें स्टोक पैलेस जाना पड़ा था। यह महल 9 मंजिलों का है, जहां ऊंची मंजिलों में शाही परिवार और निचे के मंजिलों में स्टोर रूम और अस्तबल था। अब इस महल की देखरेख पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा की जा रही है।

शांति स्तूप

शांति स्तूप

शांति स्तूप, जम्मू एवं कश्मीर में लेह के चंग्स्पा के कृषि उपनगर के ऊपर स्थित है, जिसका निर्माण शांति संप्रदाय के जापानी बौद्धों ने कराया था। शांति स्तूप दो शब्द से मिलकर बना है एक शांति और दूसरा स्तूप स्तूप का शाब्दिक अर्थ खम्बा होता है जो बुद्ध की कहानियों का प्रतिनिधित्व करता है। इस स्तूप का निर्माण 1983 में परमपावन दलाई लामा के आदेश पर किया गया था । दलाई लामा ने आदेश देते हुए कहा था की ऐसा करने से भगवान बुद्ध के सिद्धांतों को आम जन तक आसानी से पहुँचाया जा सकता है। ये स्थान लेह से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जो लेह पैलेस के पास स्थित है।

स्पितुक मठ

स्पितुक मठ

स्पितुक मठ जम्मू कश्मीर के लद्दाख में स्थित है। इसे स्पितुक गोम्पा के नाम से भी जाना जाता है। ये मठ लेह से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मठ का निर्माण 11 वीं शताब्दी में ओद डी द्वारा करवाया गया था। यहाँ आने वाले पर्यटक इस शानदार मठ को इसकी सुन्दरता के कारण कभी नहीं भूल पाएंगे। यहाँ आकर पर्यटकों को कई ऐसी जानकारियाँ प्राप्त होंगी जिससे उन्हें बौद्ध धर्म से और ज्यादा रू-ब-रू होने का मौका मिलेगा।

स्टोक पैलेस

स्टोक पैलेस

स्टोक पैलेस, राजा सेस्पाल तोंडुप नामग्याल द्वारा 1825 में निर्मित किया गया था।ये स्थान सिंधु नदी से 15 किमी की दूरी पर स्थित है। इस महल में 108 खंडों में कंग्युर मौजूद हैं जो यहाँ के पवित्र ग्रन्थ है। इस स्थान का इस्तेमाल राजा सेंग्गे नामग्याल और उनके उत्तराधिकारियों के रहने के लिए होता था।महल सुंदर स्थापत्य पैटर्न के साथ पारंपरिक शैली में बनाया गया था। यहाँ का सूर्योदय और सूर्यास्त एक देखने लायक चीज है । वार्षिक मुखौटा नृत्य महोत्सव यहाँ का एक अन्य आकर्षण है जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं।यहाँ आकर आप कई सारी चीजों का दुर्लभ संग्रह देख सकते हैं।

थिकसे मठ

थिकसे मठ

थिकसे मठ लेह से 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जो मध्यकालीन युग को दर्शाता है। एक एक 12 मंजिला ऊंची ईमारत है जो इलाके का सबसे बड़ा मठ है। यहाँ आने वाले पर्यटक सुन्दर और शानदार स्तूप, मूर्तियाँ, पेंटिंग,थांगका और तलवारों को देख सकते हैं जो यहाँ के गोम्पा में राखी हुई हैं । यहाँ पर एक बड़ा सा पिलर भी है जिसमें भगवान बुद्ध के द्वारा दिए गए सन्देश और उपदेश लिखे हुए हैं। इस मठ में आयोजित होने वाला थिकसे महोत्सव यहाँ का एक अन्य आकर्षण हैं जो दो दिनों तक चलता है। इस स्थान के पास में ही शेय गोम्पा और माथो गोम्पा मौजूद हैं जो यहाँ के अन्य आकर्षण हैं।

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