उत्तर प्रदेश सिर्फ राजनितिक नजरिये से ही नहीं बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी जाना जाता है। यहां पर्यटकों के लिए घूमने के लिए दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल, प्राचीन नगरी काशी, नवाबों की नगरी लखनऊ आदि शमिल है। इन्ही पर्यटन स्थलों के बीच एक और बेहद ही खूबसूरत विश्वविखाय्त पर्यटन स्थल है सारनाथ।
सारनाथ उत्तर प्रदेश की नगरी काशी से करीबन दस किमी की दूरी पर स्थित है। सारनाथ की सबसे बड़ी प्रसिद्ध है यहां का डियर पार्क, जहां गौतम बुद्ध ने अपने पहला उपदेश दिया था। आज उसी जगह का धमेक स्तूप स्थित है। जिसे आज देश ही बल्कि विदेशों से भी लोग देखने आते हैं। सिलेन्डर के आकार के इस स्तूप का आधार व्यास 28 मीटर है जबकि इसकी ऊंचाई 43.6 मीटर है। धमेक स्तूप को बनवाने में ईट और रोड़ी और पत्थरों को बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किया गया है।
बता दें, सारनाथ भारत के चार प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थलों में एक है। लाखो की तादाद में यहां पर्यटक बौद्ध स्तूपों को और उस जगह को देखने आते हैं, जहां महात्मा गौतम बुद्ध ने अपने पहला उपदेश दिया था। आइये जानते हैं कि, पर्यटक सारनाथ में क्या क्या देख सकता है-

कब हुआ था निर्माण?
धमेक स्तूप का निर्माण 500 ईस्वी में सम्राट अशोक द्वारा 249 ईसा पूर्व बनाए गए एक स्तूप व अन्य कई स्मारक के स्थान पर किया गया था। दरअसल सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में कई स्तूप बनवाए। इन स्तूपों में गौतम बुद्ध से जुड़ी निशानियां रखी गईं थी। लाखो की तादाद में यहां पर्यटक बौद्ध स्तूपों को देखने आते हैं।Pc:Ken Wieland

धर्मचक्र स्तूप
1026 ए.डी. के एक शिलालेख के अनुसार, स्तूप का मूल नाम धर्म चक्र स्तूप था। अलेक्जेंडर कनिंघम के नेतृत्व में एक उत्खनन अभियान में यहां एक पत्थर का टुकड़ा निकला जिसपर ब्राह्मी स्क्रिप्ट में 'आप धर्म हेतू प्रभाव हेतु' लिखा था। जो मंदिर के मूल नाम का कारण माना जाता है।
इसके अलावा यहां कई और भी अन्य चीजें निकली थी, जो पर्यटकों के सर्वेक्षण के लिए रखी गयी हैं। ये कोई नहीं जनता कि, स्तूप को अपना वर्तनाम नाम कब मिला, लेकिन कहा जाता है कि,इस यह नाम बौद्ध भिक्षुयों द्वारा दिया गया था।

मिनी स्तूप
धमेक स्तूप के आसपास कई छोटे छोटे स्तूपों को देखा जा सकता है, जिनके बारे में कहा जाता है कि, इन सभी का निर्माण महान शासक अशोका द्वारा किया गया था। हालांकि आज यह स्तूप दयनीय स्थिति में हैं, लेकिन आज भी ये पर्यटकों को अपनी वास्तुकला से हतप्रभ करते हैं।
Pc:Varun Shiv Kapur

पहला धर्मोपदेश
उस स्थान पर जहां भगवान बुद्ध ने अपने शिष्यों के लिए ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला धर्मोपदेश दिया, वह जगह भगवान की मूर्तिकला के साथ चिन्हित हैं। इस जगह पहले भगवान बुद्ध की चरण चिन्ह थे, लेकिन समय के साथ अब वह गायब हो चुके हैं। उस दौरान अशोका के पास भगवान बौद्ध की एक मूर्ति थी, जो आज पर्यटकों के लिए रखी गयी है। आज, यहां आने वाले भक्त इस मूर्तिकला से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इस जगह में एक पवित्र और सकारात्मक उर्जा है।

रूल्स और समय
स्तूप को देखने के लिए पर्यटकों को कुछ नियम कायदे कानून को फ़ॉलो करना होता है। स्तूप को घूमते समय चप्पल को बाहर ही उतारने के निर्देश हैं, साथ ही मोबाइल का प्रयोग वर्जित है।
दिसम्बर-जनवरी= सुबह 11: 30 बजे 12:30 दोपहर तक
फरवरी-नवंबर= सुबह 11:30 बजे से 1:30 बजे दोपहर Pc:Sudiptorana



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