दिल्ली...महाभारतकाल से लेकर अंग्रेजों के शासनकाल तक और आजादी के बाद देश की राजधानी बनकर हमेशा से देश की राजनीति का केंद्र-बिन्दु बनी रही है। महाभारत के समय दिल्ली पर पांडवों का शासन था, उसके बाद से लेकर अब तक दिल्ली पर अलग-अलग शासकों ने शासन किया जिनमें हिंदू राजा, मुगल बादशाह और अंग्रेज भी शामिल रहे। इसके बाद दिल्ली लोकतांत्रिक देश भारत की राजधानी बनी।

इसलिए दिल्ली शहर का विकास और विस्तार दोनों ही काफी तेजी से हुआ। इतिहासकारों का कहना है कि वर्तमान दिल्ली महानगर आसपास के 18 शहरों को मिलाकर बना है। दिल्ली महानगर के विस्तार को 3 भागों में बांटा जा सकता है, इंद्रप्रस्थ से लेकर ब्रिटिश राज से पहले की दिल्ली, ब्रिटिश राज की दिल्ली और वर्तमान दिल्ली। खास बात यह है कि जब-जब दिल्ली का मुख्यालय बदला, तब-तब दिल्ली का नाम भी बदला और मुख्यालय के नाम से ही इस शहर को संबोधित किया जाने लगा।

दिल्ली के 16 नामों की सूची
हम यहां दिल्ली के 16 नामों के साथ-साथ उस दौरान यहां के शासकों के नाम भी प्रस्तुत कर रहे हैं।
| हिन्दू शासकों के राज में दिल्ली | ||
| 1 | पांडव (महाभारत काल) | इंद्रप्रस्थ |
| 2 | राजा अनंगपाल | अनंगपुर |
| 3 | रायपिथौरा | मेहरौली |
| मुस्लिम शासकों के राज में दिल्ली | ||
| 4 | सुल्तान के नौकरों के राज में | किला रायपिथौरा |
| 5 | सुल्तान खैकाबाद | किलखोरी |
| 6 | अला-उद-दीन खिलजी | सीरी |
| 7 | घियास-उद-दीन तुगलक | तुगलकाबाद |
| 8 | फिरोज़ शाह तुगलक | फिरोज़ाबाद |
| 9 | खिज़्र खान | खिज़्राबाद |
| 10 | मुबारक शाह | कोटला मुबारकपुर |
| 11 | हुमायुँ | दीनपनाह |
| 12 | शेर शाह सूरी | शेरगढ़ |
| 13 | सलीम शाह सूरी | सलीमगढ़ |
| 14 | शाहजहॉं | शाहजहानाबाद |
| ब्रिटिश काल में दिल्ली | ||
| 15 | विभिन्न गवर्नर जनरल | कश्मीरी गेट सिविल लाइंस |
| 16 | विभिन्न गवर्नर जनरल | नई दिल्ली |
| स्वतंत्रता के पश्चात दिल्ली | ||
| 16 | भारत सरकार एवं दिल्ली सरकार | नई दिल्ली |
अब बात दिल्ली के विस्तार की
जिन शहरों को मिलाकर वर्तमान दिल्ली महानगर का निर्माण हुआ है (इतिहासकारों के अनुसार) उन्हें अलग-अलग राजाओं के शासनकाल के आधार पर 3 भागों में वर्गीकृत किया गया है। इतिहासकारों के अनुसार दिल्ली पर सबसे पहले हिंदू राजाओं का शासन हुआ करता था। इसके बाद मुगलों (मुस्लिम शासकों) ने दिल्ली पर शासन किया और आखिर में ब्रिटिश राज का शासन था। दिल्ली की गद्दी पर जितनी बार शासक बदले, उतनी बार शासकों ने दिल्ली के आसपास के किसी नये शहर या क्षेत्र को अपना मुख्यालय बनाकर अपने शासन का संचालन किया।
दिल्ली पर जब हिंदू राजाओं का शासनकाल था
दिल्ली के इतिहास में यहां शासन करने वाले जिन हिंदू राजाओं का नाम दर्ज है, उनमें सबसे पहला नाम पांडवों का आता है। हम सभी जानते हैं पांडवों ने इंद्रप्रस्थ को अपनी राजधानी बनायी थी। राजा अनंगपाल जब दिल्ली के सिंघासन पर बैठे तो उस समय अनंगपुर को उन्होंने अपने शासन का मुख्यालय बनाया। इसके बाद रायपिथोड़ा शासनकाल के दौरान मेहरौली इसका मुख्यालय बना।
मुस्लिम शासकों ने कहां-कहां बनाया अपना मुख्यालय
जब दिल्ली का शासन 'गुलाम सुल्तानों' (Slave sultans) के हाथों में गया यानी कुतूबुद्दीन-ऐबक, इल्तुतमिश के समय में किला रायपिथौड़ा दिल्ली के शासन का मुख्यालय बना। जब दिल्ली पर शासन का केंद्र कैकाबाद बना तो उस समय मुख्यालय कीलखोरी को बनाया गया। अलाउद्दीन-खिलजी ने दिल्ली की गद्दी पर बैठकर सिरी को अपना मुख्यालय बनाया। उसी तरह से ग्यासुद्दीन-तुगलक ने तुगलकाबाद को अपना मुख्यालय बनाया।

मुहम्मद-बिन-तुगलक ने जहांपनाह को, फिरोजाबाद को फिरोज-शाह-तुगलक ने मुख्यालय बनाया। खिरज़ाबाद को खिज़र खान, मुबारकपुर या कोटला मुबारकपुर को मुबारक शाह ने मुख्यालय बनाया। हुमायूं दीनपनाह, शेरशाह सूरी ने शेरगढ़, सलीम शाह सूरी ने सलीमगढ़ और आखिरकार शाहजहां ने शाहजहानाबाद को अपना मुख्यालय बनाया। इस तरह हर एक मुस्लिम शासक ने दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों को अपना मुख्यालय बनाया और इन सभी शहरों का विकास भी तेजी से होता गया। साथ ही ये शहर दिल्ली में जुड़ते चले गये।
अंग्रेजों ने दिल्ली को बनायी अपनी राजधानी
अंग्रेजों ने अपने शासनकाल के शुरुआत में कोलकाता (तत्कालिन कलकत्ता) को अपनी राजधानी बनायी थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसे स्थानांतरित कर दिल्ली को अपनी राजधानी बनायी। उस समय उन्होंने दिल्ली के कश्मीरी गेट-सीविल लाइन इलाके के आसपास के क्षेत्रों को ही अपना मुख्यालय बनाकर राजपाट का संचालन किया था।

इसके बाद धीरे-धीरे नई दिल्ली क्षेत्र का विकास हुआ जो वर्तमान समय में भी देश की राजधानी कहलाती है। आजादी के बाद भारत में जब लोकतंत्र की स्थापना हुई तब नई दिल्ली को ही राजधानी बनाया गया। इस वजह से देश के दूसरे शहरों की तुलना में दिल्ली और नई दिल्ली का विकास काफी तेजी से हुआ।



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