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कभी यह किला हुआ करता था तोपों की खान...छुपा है इसमें अरबों का खजाना

Written By: Goldi

राजस्थान में स्थित भव्य किले और महल से जुड़ी कोई ना कोई दिलचस्प कहानी है, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। चाहे वह आमेर किला हो या फिर नाहरगढ़ किला और या फिर जयगढ़ किला।

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इन किलो का दिलचस्प इतिहास..पर्यटकों के बीच इन्हें देखने की दिलचस्प पैदा करती है। कहा जाता है कि, जयपुर स्थित जयगढ़ किले में कोई खजाना छुपा हुआ है..जिसे आज तक कोई भी नहीं जान सका।

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जयगढ़ किला अरावल  रेंज के चील का टीला पर बना हुआ है।आमेर किले और मोटा सरोवर से इसे देखा जा सकता है, यह किला भारत के राजस्थान के जयपुर में आमेर के पास बना हुआ है। इस दुर्ग का निर्माण जयसिंह द्वितीय ने शत्रुओ से अपनी एवं अपनी परिवार और प्रजा की रक्षा के लिए 1726 ई. में आमेर दुर्ग के भीतर करवाया था।

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उस समय इसका एक और उद्देश्य तह आमेर के किले एवं महल परिसर की सुरक्षा इसीलिए इसमें विश्व की सबसे बड़ी तोप रखी है।जो की दुश्मन को आमेर के किले तक पहुंचने से रोक सकती थी, इस किले का नाम जयसिंह द्वितीय और इसकी अजेय स्थिति को ध्यान में रख कर जयगढ़ का किला नाम रखा गया है। इस किले के दो प्रवेश द्वार है जिन्‍हे दूंगर दरवाजा और अवानी दरवाजा कहा जाता है जो क्रमश: दक्षिण और पूर्व दिशाओं पर बने हुए है।

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इस किले को आमेर किले के आकार में ही बनाया गया है।उत्तर-दक्षिण से इसकी लम्बाई 3 किलोमीटर (1.9 मीटर) और चौड़ाई 1 किलोमीटर (0.62 मीटर) है।इस किले को "जयवैन" के नाम से भी जाना जाता है। महल के कॉम्प्लेक्स में लक्ष्मी विलास, ललित मंदिर, विलास मंदिर और आराम मंदिर भी बना हुआ है और एक हथियार ग्रह और म्यूजियम भी बना हुआ है। जयगढ़ किला और आमेर किला एक ही कॉम्प्लेक्स से जुड़ा हुआ है।

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