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रहस्य : हिमाचल की इस झील में गढ़ा है अरबों-खरबों का खजाना

भारत का पहाड़ी राज्य हिमाचल अपने पौराणिक महत्व के साथ-साथ रहस्यों का गढ़ भी माना जाता है। बर्फ की चादर ओढ़े यहां कई ऐसे स्थल मौजूद हैं जिनका इतिहास काफी पुराना बताया जाता है। कुछ स्थलों की पहचान महाभारत काल से की गई है जबकि कुछ स्थल आज भी हमारे सामने मात्र रहस्य के रूप में मौजूद हैं।
लेकिन आज हम किसी भूखंड की नहीं बल्कि हिमाचल में मौजूद एक ऐसी झील बात करेंगे जहां अरबों-खरबों का खजाना गढ़े होने की बात कही जाती है। जिसके बारे में आज तक कोई पता नहीं लगा सका। जानिए इस झील से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को। अगर आप रोमांच के साथ रहस्य का भी शौक रखते हैं तो यहां का प्लान बना सकते हैं।

उमड़ पड़ता है जन सैलाब

उमड़ पड़ता है जन सैलाब

PC- Dhiman.ashishpro

कमरुनाग झील मंडी के पहाड़ों के बीच स्थित है। इस झील का नाम घाटी के देवता कमरुनाग के नाम पर पड़ा है। धार्मिक मान्यता है कि प्रतिवर्ष 14-15 जून को बाबा कमरुनाग पूरी दुनिया में दर्शन देते हैं। इस दौरान हिमाचल में भक्तों का उत्साह देखने लायक होता है।अद्भुत : यहां भूत को चढ़ाया जाता है मिनरल वाटर और सिगरेट

कहा जाता है कि बाबा कमरूनाग में बहुत शक्ति है वे अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करते हैं। इसलिए श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पैदल यात्रा कर कमरूनाग पहुंचते हैं। अपनी-अपनी मन्नते लिए भक्त जयकारा लगाते हुए कई किमी का रास्ता तय करते हैं।अद्भुत : यहां लगता है भूत-पिशाचों का सबसे बड़ा बाजार

सोने-चांदी की बरसात

सोने-चांदी की बरसात

कमरूनाग पहुंचने के लिए भक्तों की पैदल यात्रा रोहांडा से शुरू होती है। रोहांडा मंडी से लगभग 60 किमी की दूरी पर स्थित है। कठीन पहाड़ी रास्तों से होते हुए भक्त मंदिर दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर के सामने एक झील है जो कमरूनाग झील के नाम से प्रसिद्ध है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां भक्त सोने-चांदी के गहने आदि डालते हैं। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के कारण इस झील में अरबो रूपए का सोना-चांदी जमा हो गया है। कहा जाता है कि यह झील सीधे पाताल तक जाती है। जिसमें देवी-देवताओं का भी खजाना छिपा है।अद्भुत : झारखंड के जंगलों के बीच मौजूद भारत का अदृश्य लंदन

महाभारत काल से संबंध

महाभारत काल से संबंध

कमरूनाग देवता का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। इसलिए बाबा कमरूनाग जी को बबरूभान जी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक साक्ष्यों के अनुसार कमरूनाग धरती के सबसे बलशाली योद्धा थे। लेकिन भगवान कृष्ण के आगे इन्हे झुकना पड़ा।

ऐसा कहा जाता है कि महाभारत युद्ध से पहले कमरूनाग जी ने कहा था कि जो इस युद्ध में हारने की स्थिति में होगा मैं उसका साथ दूंगा। इसी बीच कृष्ण ने एक नीति के तहत कमरूनाग जी का सर ही मांग लिया। कहा जाता है अगर कमरूनाग कौरवों का साथ दे देते, तो पांडव युद्ध में कभी विजयी नहीं हो पाते।रहस्यमयी सुरंगों वाली बावड़ी, जहां छुपा है अरबों का खजाना

कमरुनाग के सर की ताकत

कमरुनाग के सर की ताकत

कहा जाता है कि कमरूनाग जी के कटे सर में भी अपार ताकत थी। भगवान कृष्ण ने इनका सर हिमालय की एक ऊंची चोटी पर रखवा दिया था। लेकिन सर जिस तरफ घूमता वह सेना जीत की ओर बढ़ती। पौराणिक मान्यता के अनुसार कृष्ण ने कटा सर पत्थर से बांध कर पांडवों की ओर मोड़ दिया था।

मान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि जिसके बाद भीम ने अपनी हथली को गाढ़ कर एक झील बनाई जिससे की कमरुनाग को पानी की कोई दिक्कत न हो। अब यह झील कमरुनाग झील के नाम से जानी जाती है।रहस्य : इस किले में आज भी भटकती है नटिन की आत्मा

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

कमरुनाग झील हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित है। कमरुनाग के लिए सीधी सड़क नहीं है, आप मंडी से रोहांडा तक सड़क मार्ग के द्वारा जा सकते हैं, जिसके बाद आपको लगभग 8 किमी की चढ़ाई करनी होगी। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा कुल्लू एयरपोर्ट है। रेल मार्ग के लिए आप जोगिंदर नगर रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं।रहस्य : भारत की यह नदी सदियों से उगल रही है सोना !

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