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कोलुकुमलाई-दुनिया का सबसे ऊँचा चाय बगान

Written By: Goldi

अगर सुबह की शुरुआत चाय से ना हो तो लगता है कि, दिन काफी अधूरा अधूरा सा लगता है । जिसके चलते हम दिन में कई वक़्त गर्मागर्म चाय का मज़ा उठाना पसंद करते हैं।

चाय का सबसे महत्व्पूर्ण उत्पादक होने के कारण भारत को अपने प्रभावशाली चाय बगानों पर गर्व है। यह चाय बगान पूरे देश में विभिन्न राज्यों में बिखरे हुए हैं। विदेशी पर्यटक भी भारत आकर चाय बगान जाना नहीं भूलते।

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यूं तो भारत में कई चाय बगान है..लेकिन आज मै आपको रूबरू कराने जा रही हूं तमिल नाडू स्थित बेहद खूबसूरत कोलुकुमलाई चाय बगान से।

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इस चाय बगान में आप इस निर्मल हरियाली का मज़ा उठा सकते हैं जो उनको अपनी भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी से एक काफी आवश्यक ब्रेक दिलाता है। आप इस चाय बगान से असली चाय की पत्तियां भी ला सकते हैं।

कोलुकुमलाई

कोलुकुमलाई

कोलुकुमलाई तमिलनाडु के छोटे से गांव बोधिन्यकनुर के पास स्थित है। जोकि चाय का बागानों के लिए मशहूर मुन्नार से महज 30 किमी की दूरी पर स्थित है। समुद्र तल से 7900 फीट की ऊंचाई पर दुनिया का सबसे ऊंचा चाय बागान है। PC:Kishrk91

कोलुकुमलाई

कोलुकुमलाई

कोलुकुमलाई में चाय की खेती की शुरुआत 1940 में अंग्रेजो द्वारा हुई थी...और यहां भी आपको कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिलेंगे, यहां आप अभी भी अंग्रेजो के जमाने की मशीनों को देख सकते हैं।यहां चाय की खेती ढलानों पर होती है..बताया जाता है कि, ढलानों पर चाय की खेती करने से चाय की गुणवत्ता में और भी बेहतर होती है।
PC:Arun Muralidhar

मैटपेट्टी डैम

मैटपेट्टी डैम

मैट्यूपेट्टी डैम हाइड्रोइलेक्ट्रिकिटी बनाने के लिए पानी के संरक्षण द्वारा पहाड़ों में निर्मित भंडारण कंक्रीट ग्रेविटी बांध है। बांध का सबसे आकर्षक हिस्सा वहां मौजूद पानी है..जिसमे चाय के बागानों का प्रतिबिंब को चारों ओर दर्शाता है। यहां आने वाले पर्यटक इस डैम में बोटिंग का मजा भी ले सकते हैं, जोकि जिला पर्यटन प्रचार परिषद द्वारा आयोजित किया जाता है।PC: Raj

मीसुपुलीमाला

मीसुपुलीमाला

मीसापुलीमाला इडुक्की जिले में अनमूड़ी के बाद पश्चिमी घाटियों में दूसरी सबसे ऊँचा शिखर है। इस शिखर पर आठ पहाड़ियों का गठन होता है । यह पहाड़ी ट्रेकर्स के लिए स्वर्ग है..इस चोटी के ऊपर पहुंचने के बाद आप कोलुककुलाई चाय बागन को बखूबी निहार सकते हैं ।PC: Niyas8001

देविकुलम

देविकुलम

देविकुलम एक बेहद ही छोटा और खूबसूरत हिल स्टेशन है जो समुद्र तल से 5,900 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। किंवदंतियों के अनुसार, सीता देवी ने देविकुलम झील के पानी में स्नान किया था। हरी पहाड़ियों से घिरा, झील न केवल अपनी पवित्रता के लिए बल्कि इसके जल के रोगाणु शक्ति के लिए बहुत से पर्यटकों को आकर्षित करती है।PC: Manoj CB

चिन्नार वन्यजीव अभयारण्य

चिन्नार वन्यजीव अभयारण्य

चिन्नार वन्यजीव अभ्यारण्य दक्षिणी दिशा में इराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान के अधिकार क्षेत्र में स्थित है, पूर्व दिशा में इंदिरा गांधी वन्यजीव अभ्यारण्य और पूर्व में कोडाईकनाल वन्यजीव अभयारण्य है। वन्यजीव अभयारण्य वनस्पति और जीवों की विशाल विविधता का घर है। इस अभयारण्‍य में 34 प्रकार के स्‍तनधारी जीव पाएं जाते है जिनमें से पैंथर, स्‍पॉटेड हिरन, गौर, टाइगर, हाथी, बॉनेट मकाऊ, नीलगिरि तहर, हनुमान मंकी और ग्रिल्‍ड जाइंट स्‍वक्‍वीरिल आदि पाएं जाते है।PC:Kerala Tourism

कैसे जायें

कैसे जायें

हवाई जहाज द्वारा
कोलुकुमलाई का निकटतम हवाई अड्डा कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो यहां से 105 किमी दूर स्थित है। हवाई अड्डे पर पूरे देश के सभी बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद आदि और कुछ विदेशों में भी नियमित उड़ानें हैं।सैलानी यहां से बस या टैक्सी द्वारा कोलुकुमलाई आसानी से पहुंच सकते हैं।

ट्रेन द्वारा
यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन अलवेई जंक्शन है जो कोलुकुमलाई से 120 किमी दूर है। यह स्टेशन देश के सभी प्रमुख शहरों और शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। सैलानी यहां से बस या टैक्सी द्वारा कोलुकुमलाई आसानी से पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग से
कोलुककुलाई तक पहुंचने का सबसे बेहतरीन तरीका सड़क मार्ग है, इस जगह से नियमित रूप से पूरे राज्य से और पड़ोसी राज्यों की भी बसें मिल जाती हैं।PC:Arun Muralidhar

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