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लड़की की खूबसूरती पड़ी गांव को महंगी, उजड़ गया पूरा गाँव और बन गया हॉन्टेड

एक ओर जहां भारत अपनी विविधता और संस्कृति के कारण दुनिया भर में अपनी साख जामये हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ इसके दामन में कई महत्त्वपूर्ण राज भी दबे पड़े हैं। भारत की झोली में दफ़न ये राज कहीं बड़े रोचक हैं तो कहीं बेहद डरावने। ये राज व्यक्ति को इतना भयभीत कर सकते है कि सिर्फ सुनने और बताने मात्र से ही व्यक्ति के रौंगटे खड़े हो जाते हैं और वो डर के मारे कांप उठता है। हम आपको ऊपर बता चुके हैं कि भारत रहस्यों और आश्चर्यों का देश है तो आज इसी क्रम में हम आपको अवगत कराएंगे भारत के एक ऐसे गांव से जो किसी ज़माने में बेहद खूबसूरत और जीवांत था लेकिन फिर कुछ ऐसा हो गया की ये हंसता खेलता गांव उजड़ गया और यहां रह गए हैं वो खंडहर जो इस गांव की बदहाली और एक विचित्र खौफ को दर्शाते हैं।

सुंदरता या खूबसूरती ईश्वर का प्रकृति को बक्शा हुआ एक अनमोल वरदान हैं। अब इसी खूबसूरती में यदि मानव अपनी कल्पना के पंख लगाके कुछ नए का निर्माण कर दे तो फिर जो चीज निकलकर सामने आती है उसकी कल्पना शब्दों में नहीं की जा सकती। कुछ ऐसा ही हुआ राजस्थान में जहां लगभग 200 साल पहले एक गांव "कुलधारा" की नीव रखी गयी और इस गांव के निर्माण के वक़्त वास्तुकला के चरम का इस्तेमाल किया गया।

कहते हैं इस गांव के घरों में दरवाजे या किसी भी प्रकार का सिक्योरिटी सिस्टम नहीं था। इस गाँव को ऐसे बनाया गया था कि गांव का मुख्‍य प्रवेशद्वार और गांव के घरों के बीच बहुत लंबा फ़ासला हुआ करता था। लेकिन गांव के निर्माण के वक़्त ऐसी ध्‍वनि-प्रणाली का इस्तेमाल किया गया था कि गांव के मुख्य प्रवेश द्वार से ही क़दमों की आवाज़ गांव में घरों तक पहुंच जाती थी इसलिए यहां के लोगों में कभी भी चोरी और डकैती का खतरा नहीं रहता था।

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अगर इस गांव के आस पास रह रहे लोगों की माने तो उस समय कुलधारा के ये घर झरोखों और मोखरों के ज़रिए आपस में जुड़े थे और घरों के भीतर पानी के कुंडों, और सीढि़यों का बड़ी ही कुशलता के साथ निर्माण किया गया था। यहां के स्थानीय निवासियों के मुताबिक इस गांव के घर ऐसे बने थे की बहने वाली हवाएं सीधे घर के भीतर से होकर गुज़रती थीं और रेगिस्तान में होने के बावजूद ये घर बेहद ठंडे होते थे।

स्वर्ण नगरी जैसलमेर से करीब 25 किलोमीटर दूर बसे गांव कुलधारा के बारे में प्रचलित है कि ये गांव अपने एक जालिम दीवान सालिम सिंह की वजह से श्रापित हुआ है। आज भी इस गांव पर उस समय रहने वाले पालीवाल ब्राह्मणों का श्राप है। भवन निर्माण इन ब्राह्मणों का मुख्य व्यवसाय हुआ करता था और उस समय इनकी निपुणता की चर्चा दूर दूर तक थी। बताया जाता है कि राज्य को इन ब्राह्मणों से राजस्व और लगान के जरिये बड़ा फायदा होता था।

कुलधारा जो है एक श्रापित गांव

श्राप और गांव के वीरान होने के सन्दर्भ में पता चलता है कि यहाँ के मुखिया की एक बेटी थी जो बहुत सुन्दर सभ्य और सुशील थी। इस लड़की की सुन्दरता के चर्चे कुलधारा के अलावा पूरे राज्य में फैले हुए थे। जो भी इस लड़की को देख लेता मोहित हो उठता था ब्राह्मणों के मुखिया की बेटी की खूबसूरती देखकर जैसलमेर का ये दीवान सालिम सिंह भी मोहित हो उठा और वो किसी भी हाल में इस लड़की को अपने हरम में रखना चाहता था।

जिसके चलते सालिम सिंह ने पहले मुखिया फिर सारे गाँव वालों पर दबाव बनाना शुरू किया। उस समय गांव पर सालिम सिंह के अत्याचार इस कद्र बढ़ गए थे कि लोगों का जीना मुश्किल हो गया। फिर एक दिन सारे ब्राह्मणों ने मिलकर पंचायत की और रातों रात इस गांव को छोड़ दिया। जाते समय ब्राह्मणों ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए इस गाँव को श्राप दिया की ये गांव हमेशा वीरान रहेगा और फिर कभी बसेगा नहीं। आज इस बात को 200 साल से ऊपर हो गए हैं मगर फिर भी आज तक ये गाँव भुतहा और वीरान है। आज भी जब यहां कोई जाता है तो वो एक अजब से डर और घबराहट का सामना करता है।

यहां आने वालों के मुताबिक जैसे जैसे आप इस गांव के खँडहर में चलते जाएंगे आपको एक अजीब सी ठंड और बेचैनी का एहसास होगा।आज यहां कई सारे होटल और रिसोर्ट हैं जो आपको आपके रिस्क पर इस गांव का भ्रमण कराते हैं तो अगर आप राजस्थान में हैं तो एक बार इस वीरान गांव की रोमांचकारी यात्रा अवश्य करें।

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