चेरापूंजी - पूर्वोत्तर भारत का एक शहर जिसके पास मौजूद है दुनिया के सबसे गीले शहर का खिताब। कुछ समय पहले तक चेरापूंजी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सर्वाधिक बारिश वाली जगह के तौर पर ही दर्ज थी। फिलहाल यह खिताब चेरापूंजी से मात्र 100 किमी की दूरी पर बसे मेघालय के ही एक छोटे से शहर मौसिनराम के पास मौजूद है। हालांकि इससे चेरापूंजी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आयी है।
जिन लोगों को बारिश की बूंदें आकर्षित करती हैं उनके लिए चेरापूंजी एक जन्नत है। इस शहर की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां बारिश के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता है। कभी हल्की-फुल्की बारिश की फुहारें तो कभी तेज मूसलाधार बारिश यहां होती ही रहती है।

प्रकृति से लगाव हो तो चेरापूंजी की बारिश आपको परेशान नहीं बल्कि आपको सुकून देगी। यहां हर साल हजारों की संख्या में घूमने जाते हैं और मानसून में तो बारिश को एंजॉय करने जाने वाले पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि होती है। वैश्विक स्तर पर चेरापूंजी का नाम सबसे ज्यादा बारिश और हरियाली की वजह से लोकप्रिय होने के कारण यहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी अक्सर आते रहते हैं।
कैसा होता है चेरापूंजी का मौसम
आमतौर पर चेरापूंजी के मौसम का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल होता है। यहां के मौसम को देखकर आपको हमेशा ही ऐसा लगेगा कि बारिश बस होने ही वाली है लेकिन कितनी देर में बारिश शुरू होगी या कितनी तेज और कितनी देर तक होगी...यह बता पाना टेढ़ी खीर है। इसलिए चेरापूंजी की यात्रा का प्लान बनाने से पहले हमेशा वहां के मौसम के बारे में स्थानीय स्तर पर अपडेट लेने की कोशिश करें। बताया तो यह भी जाता है कि चेरापूंजी में नियमित अंतराल पर मौसम में बदलाव जरूर आता है लेकिन बारिश का होना यहां अनिवार्य है।

मानसून में चेरापूंजी
अगर आप मानसून के समय चेरापूंजी जाने के बारे में किसी भी ट्रैवलर से बात करेंगे तो अधिकांश आपको मानसून में अपना प्लान कैंसिल करने की ही सलाह देंगे। लेकिन दिल है कि मानता नहीं...क्योंकि इसे तो कुछ Daring और तूफानी करना है। मानसून के समय चेरापूंजी में पूरे दिन ही भारी बारिश हो सकती है। इसलिए अगर आप मानसून में चेरापूंजी जाने का प्लान बना रहे हैं तो तैयार रहे कि आपको अपना अधिकांश समय होटल के कमरे में ही बिताना पड़ सकता है।
घूमने के लिए अगर आप बाहर निकलते हैं तो सुरक्षित दूरी बनाकर चेरापूंजी के वाटरफॉल्स का लुत्फ उठाना मत भूलें क्योंकि बारिश के मौसम में झरनों की जो सुन्दरता होती है उसे पूरी जिन्दगी भूला पाना असंभव सा होता है। इसके साथ ही मानसून में चुंकि पर्यटकों बहुत ही कम संख्या में चेरापूंजी आते हैं। इसलिए आपको होटल के अच्छे ऑफर मिलने की भी संभावना होगी। चेरापूंजी का मानसून सीजन मई से सितंबर तक का होता है।

क्या-क्या देखें चेरापूंजी में
चेरापूंजी एक ऐसी जगह है जहां लोग अक्सर मौसम को ही एंजॉय करने जाते हैं। इसलिए अगर आप चेरापूंजी में सिर्फ बारिश की बूंदों को ही एंजॉय करते हुए अपना समय बिताते हैं तब भी आपको बोरियत महसूस नहीं होगी। इसके साथ-साथ चेरापूंजी के आसपास कुछ शानदार वाटरफॉल्स भी हैं, जो बारिश के समय काफी एक्टिव हो जाते हैं। लेकिन मानसून में उन वाटरफॉल्स पर घूमने जाने से पहले सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।
जीवित मूल ब्रिज (Living Root Bridges)
मेघालय के Living Root Bridge यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल हो चुके हैं। खासबात यह है कि ये सभी ब्रिज इंसानों द्वारा ही बनाए गये हैं लेकिन प्रकृति ने भी इन्हें निर्माण में अपना भरपूर सहयोग दिया है। इनमें से कुछ ब्रिज तो डबल-डेकर भी होते हैं। पर्यटक ब्रिज के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाने के लिए एडवेंचर ट्रैकिंग करते हैं। चेरापूंजी के पास मौजूद नोनग्रैट गांव में आपको कई तरह के ऐसे ब्रिज मिल जाएंगे, जिन्हें आप एक्सप्लोर कर सकते हैं। इन ब्रिज के पास आपको होमस्टे भी मिलेंगे जहां आप घरेलू माहौल में रुक कर अपने ट्रिप को एंजॉय भी कर सकते हैं।

नोहकलिकाई वाटरफॉल
चेरापूंजी में मौजूद नोहकलिकाई वाटरफॉल दुनिया का सबसे ऊंचा झरना है। लगभग 340 मीटर की ऊंचाई से जब झरने का पानी नीचे झील में गिरता है, तो एक पल के लिए इंसान इस झरने की खूबसूरती में ही गोते लगाने लगता है। आमतौर पर हर समय ही इस झरने के आसपास का पूरा परिवेश हरियाली से भरा रहता है। मानसून के समय तो झरने में पानी की मात्रा सर्वोच्य होती है। लेकिन दिसंबर से फरवरी के समय जब बारिश कम होती है, तब भी यह झरना बहुत सुन्दर दिखाई देता है।
काइनरेम वाटरफॉल
यह झरना भी भारत के सबसे ऊंचे झरनों में से एक है। तीन स्तरीय इस झरने की सुन्दरता मानसून के मौसम के साथ-साथ गर्मियों के मौसम में भी कई गुणा बढ़ जाती है। चेरापूंजी के प्रसिद्ध सोहरा मार्केट से यह झरना काफी पास में ही मौजूद है। यह चेरापूंजी के दक्षिणपश्चिम में स्थित है, जहां पर्यटक अक्सर घूमने के लिए जाते रहते हैं।

चेरापूंजी कौन से सामान ले जाना अनिवार्य
- परिधान - चेरापूंजी के लिए पैकिंग करते समय हमेशा ऐसे परिधानों को ही चुने जिनके गीले होने पर भी आपको कोई परेशानी न हो। आप सूती के कपड़ों के बजाए सिंथेटिक, कॉटन या सिल्क मिक्स या रफ क्लॉथ भी चुन सकते हैं। और हां, अपने साथ पर्याप्त संख्या में कपड़े जरूर रखें।
- जूते - बारिश हो या न हो, सड़कें और रास्ते तो गीले ही मिलेंगे। इसलिए हमेशा वाटरप्रुफ जूते या बेहतर हो क्रॉक्स की तरह से फुटवेयर का इस्तेमाल करें। और हां, मोजों की अतिरिक्त जोड़ियां जरूर साथ रखें।
- छाता या रेनकोट - चेरापूंजी में कोई भरोसा नहीं है कि कब झमाझम बारिश शुरू हो जाए। इसलिए जब भी होटल में अपने कमरे से बाहर निकले तो रेनकोट या छाता लेकर जरूर जाएं।
- फ्लैश लाइट - मोबाइल में टॉर्च जरूर होता है लेकिन तेज बारिश में आप मोबाइल निकलकर उसका टॉर्च नहीं जला सकेंगे। इसलिए चेरापूंजी की ट्रिप पर फ्लैश लाइट लेकर जरूर जाएं।
- पावर बैंक - यूं तो जब भी ग्रामीण इलाकों में लोग घूमने जाते हैं, उन्हें अपने साथ पावर बैंक रखने की सलाह जरूर दी जाती है। लेकिन बारिश के मौसम में मोबाइल की बैट्री काफी तेजी से डिस्चार्ज भी होती है।
- जरूरी दवाईयां और फर्स्ट एड किट - यह हर ट्रिप पर आपके साथ होना चाहिए, लेकिन चेरापूंजी की ट्रिप पर इसका साथ होना ज्यादा जरूरी है। भींगे-भींगे मौसम में कीड़े-मकौड़ों का प्रकोप तो बढ़ता ही है, साथ में एलर्जी और मच्छर भी दोगुनी तेजी से अपना पैर पसारते हैं। कुछ जरूरी दवाईयां भी पास रखें जो आपके सिर दर्द, पेट दर्द, चोट लगने या पेट खराब होने जैसी स्थिति में साथ निभाएं।



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