रोपवे का नाम सुनते ही भले ही थोड़ा डर जरूर लगता है लेकिन मन रोमांच से भी भर जाता है। जिस दूरी को तय करने में आपको घंटों का समय लग सकता है, रोपवे से वह दूरी महज कुछ मिनटों में ही पूरी कर ली जा सकती है। इसके साथ देखने को मिलता है वह नजारा जिसे सड़क मार्ग से जाने पर आप कभी भी नहीं देख सकते हैं।
घाटी की हरियाली, नदियों का बर्ड आई व्यू और खुली ताजी हवा...जी हां, कुछ मिनटों का यह सफर ही अगले कई दिनों के लिए आपको पूरा रिफ्रेश और एनर्जी से भर देती है। हालांकि रोपवे राइड कई शहरों में मौजूद है लेकिन किन शहरों की ट्रिप पर रोपवे राइड को बिल्कुल मिस न करके इसे जरूर एंजॉय करना चाहिए?

आइए आपको बताते हैं :
मसूरी
मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है, तो इसके पीछे कुछ तो वजह होगी ही। मसूरी का रोपवे न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर के प्रमुख आकर्षणों में गिना जाता है। रोपवे से पहाड़ों का वो नजारा दिखाई देता है जिसे आप अपनी यादों में सालों तक समेट कर रखना चाहेंगे। रोपवे कार्ट में रिलैक्स होकर बैठकर आप यहां से प्राकृतिक नजारों के शानदार वीडियो भी बना सकते हैं।

गुवाहाटी
असम के गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर भारत का सबसे लंबा रिवर रोपवे बना हुआ है। जरा सोचिए...नदी को पार कर रहे हैं, वो भी नाव नहीं बल्कि रोपवे से। कितना रोमांचक लगता होगा। ब्रह्मपुत्र नदी को पार करने वाले इस रोपवे का एक तरफ का सफर मात्र 9-10 मिनट में पूरा किया जा सकता है।
इस रोपवे के हर केबिल कार में एक बार में 30 यात्रियों को बैठाने की क्षमता होती है। इसलिए गुवाहाटी में मां कामाख्या के दर्शन करने जाएं तो रोपवे राइड को बिल्कुल मिस मत करें।

मिर्जापुर
मिर्जापुर सिर्फ ओटीटी ही नहीं बल्कि असली में भी काफी फेमस जगह है। मिर्जापुर में मौजूद मां विंध्यवासिनी, कालीखोह में महाकाली और अष्टभुजा में देवी सरस्वती के दर्शन करने के लिए देश के कोने-कोने से भक्त आते रहते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं को 12 किमी की चढ़ाई और सैंकड़ों सीढ़ियां चढ़कर देवी के दर्शन करने पड़ते हैं।
इस परेशानी को दूर करने के लिए ही मिर्जापुर में रोपवे राइड की शुरुआत की गयी है। अब देवी के दर्शन करने जाने के लिए सीढ़ियों की ऊंची चढ़ाई करने की जरूरत भी नहीं पड़ती और लोगों को पहाड़ों पर से इन मंदिरों के शानदार नजारे भी दिखते हैं।

गुलमर्ग
कश्मीर और गुलमर्ग का गंडोला राइड तो एक लोकप्रिय रोपवे राइड है। गुलमर्ग में बर्फीली पहाड़ी इलाकों तक पहुंचने के लिए यह रोपवे संचालित किया जाता है। इसके दो फेज हैं। हर फेज की अपनी अलग सुन्दरता और अपना अलग रोमांच है। अगर आप स्नो एक्टिविटी में हिस्सा लेना चाहते हैं तो गुलमर्ग का गंडोला राइड आपके लिए बिल्कुल सही डेस्टिनेशन है। वहीं अगर आप प्राकृतिक सुन्दरता और बर्फ को एंजॉय करना चाहते हैं तब भी गुलमर्ग का रोपवे आपके लिए एक आदर्श जगह है।

पुष्कर
पुष्कर में सावित्री माता का मंदिर अरावली पहाड़ की चोटियों पर स्थित है। वहां तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका रोपवे है जो मंदिर के साथ-साथ पहाड़ी इलाकों और पुष्कर शहर व झील का अद्भुत नजारा दिखाता है। पुष्कर में रोपवे 202 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। रोपवे के बन जाने से न सिर्फ पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचना हर आयुवर्ग के लोगों के लिए आसान हो गया है बल्कि यह फोटोग्राफी के शौकिनों को भी शानदार फोटोग्राफ लेने का मौका देता है।

राजगीर
बिहार की राजधानी पटना के पास मौजूद राजगीर में स्थित रोपवे को भारत का सबसे पुराना रोपवे माना गया है। इस रोपवे का इस्तेमाल विश्वशांति स्तूप तक पहुंचने के लिए किया जाता है। रत्नागिरी की पहाड़ी पर स्थित इस स्तूप तक पहुंचने के लिए रोपवे की एक कार्ट में एक बार में सिर्फ एक ही व्यक्ति सवार हो सकता है। लगभग 7-10 मिनट का यह सफर राजगीर घाटी के कुछ नायाब दृश्य दिखाता है जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे।



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