ऐसा ही खूबसूरत और मनोरम वादियों वाला शहर है सिक्किम..प्रकृति ने जहाँ इस प्रदेश को अपनी खूबसूरती से चुन-चुनकर नवाजा है, तो वहीं हिमालय की गोद में बसे सिक्किम को प्रकृति के रहस्यमय सौंदर्य की भूमि या फूलों का प्रदेश कहना गलत नहीं होगा।
विश्व की तीसरी सबसे ऊंची पर्वतचोटी कंचनजंगा (28156 फुट) यहां की सुंदरता में चार चांद लगाती है। सूर्य की सुनहली किरणों की आभा में नई-नवेली दुलहन की तरह दिखने वाली इस चोटी के हर क्षण बदलते मोहक दृश्य सुंदरता की नई-नई परिभाषाएं गढ़ते हुए से लगते हैं। मनुष्य की कल्पनाओं का सागर यहां हिलोरें मारने लगता है।
यहां का मौसम बेहद ही सुहाना रहता है.. क्योंकि यहाँ का तापमान गर्मियों में कभी 28 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादातर बढ़ता नहीं है और ठण्ड में 0 डिग्री सेल्सियस पर जमता नहीं है।मानसून मौसम थोड़ा खतरनाक है क्योंकि इस दौरान यहाँ भारी बारिश होती है जिससे भूस्खलन होने का डर रहता है और पर्यटकों को यह सलाह दी जाती है कि वह इस समय यहाँ आने से बचें।

भारत की ऊँची चोटी कंचनजंघा
कंचनजंघा दुनिया की तीसरी सबसे ऊँची चोटियों में से एक है।यहां के खूबसूरत नज़ारा वाकई देखने लायक होता है। सूर्योदय होते ही उसकी किरणें सुनहरी होकर जमीन से टकराती हैं। जो सैलानियों कि अपना दीवाना बना देती है।PC:Partha Sarathi Sahana

गंगटोक
सिक्किम की राजधानी गंगटोक में पारंपरिक रीति-रिवाजों और आधुनिक जीवनशैली का अनूठा संगम देखने को मिलता है। साथ ही यह सिक्किम का सबसे बड़ा शहर है। बौद्ध धर्म के लोगों के लिए बहुत ही खास जगह है। बड़े-बडे पहाड़, बर्फ से ठकी चोटियां और स्पार्कलिंग ऑर्किड लोगों को अपनी ओर खींचती है।गंगटोक को भारत के सुन्दर शहरों में से एक माना जाता है।PC: Thrilochana

युकसोम
धार्मिक स्थलों की एक सरणी से घिरा हुआ, गेजिंग में यह ऐतिहासिक शहर सिक्किम में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है और ट्रेकर्स के बीच काफी लोकप्रिय भी है।युकसोम सिक्किम की प्राचीन राजधानी है। युकसोम का मतलब है 'स्थान जहां तीन विद्वान भिक्षुक बैठक करते हैं' और माना जाता है कि इस स्थान पर तिब्बत से तीन भिक्षुक आये थे और उन्होंने यही पर फुन्सोग नमग्याल को सिक्किम के पहले धार्मिक राजा के रूप में चुना था और उन्हें चोग्याल नाम दिया था। और अपने मोहक परिदृश्य के लिए, युकसोम की पहाड़ियों का नाम पहले ने-पेमाथांग था।
PC:Kothanda Srinivasan

नाथुला दर्रा
भारत-चीन सीमा पर स्थित नाथुला दर्रा 14,200 फीट की ऊंचाई पर है. नाथुला दर्रा सिक्किम को चीन के तिब्बत स्वशासी क्षेत्र से जोड़ता है। धुंध से ढंकी पहाड़ियां, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, गरजते झरने और यहां के रास्ते बेहद अद्भुत है । यह गंगटोक से करीब 54 किमी पूर्व में स्थित है। गंगटोक में पूर्व अनुमति के साथ केवल भारतीयों को बुधवार, गुरुवार, शनिवार और रविवार को दर्रा घूमने दिया जाता है।PC:Palakbhardwaj

सोमगो लेक
सिक्किम की राजधानी गंगटोक से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोमगो लेक अभिनव और अद्वितीय है। बेहद खूबसूरत इस प्राकृतिक झील को स्थानीय भाषा में चंगु झील या सोंगमो लेक के नाम से भी जानते हैं। एक किलोमीटर लंबी व 50 फुट गहरी यह झील पर्यटकों को बार-बार लुभाती है। सिक्किम के वातावरण का आनन्द लेने वाले पर्यटक एक बार इस झील को देखना जरूर पसन्द करते हैं।मई और अगस्त के बीच झील का इलाका बेहद खूबसूरत हो जाता है।दुर्लभ किस्मों के फूल यहां देखे जा सकते हैं. सर्दियों में झील का पानी जम जाता है।PC:Cadeepakgarg

पेलिंग
पेलिंग सिक्किम में उभरता हुआ पर्यटन स्थल है..क्यों कि उस जगह से 6,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित इसी जगह से दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट कंचनजंघा को सबसे करीब से देखा जा सकता है।PC:Amritendu Mallick

रूमटेक मोनास्ट्री
गंगटोक से करीब 24किमी दूर पर स्थित है..इस मोनेस्ट्री को धर्म चक्र के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। यह तिब्बत के बाहर काग्यू वंश के महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है।गोल्डन स्तूप इस मठ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।PC: Anja Disseldorp

दो-द्रूल चॉर्टेन
यह सिक्किम के सबसे खूबसूरत स्तूपों में से एक माना जाता है। यहां 108 प्रार्थना चक्के लगे हैं, इसमें कई मांडला सेट्स हैं।

कैसे जाएँ सिक्किम
हवाई मार्ग से
सिक्किम का अपना कोई एयरपोर्ट नहीं है। जिस कारण सिक्किम का नजदीकी एयरपोर्ट पश्चिम बंगाल में बागडोगरा जो सिलिगुड़ी में स्थित है।यह सिक्किम की राजधानी गंगटोक से करीब 125 किलोमीटर दूर स्थित है। बागडोगरा, दिल्ली और कोलकाता की नियमित उड़ानों से जुड़ा हुआ है।
रेल मार्ग से
सिक्किम में रेल नेटवर्क नहीं है लेकिन सबसे पास का रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी है, जो गंगटोक समेत पूर्वोत्तर के कई बड़े शहरों से जोड़ता है। इसके अलावा भारत में भी सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों- कोलकाता, दिल्ली से यह अच्छे-से जुड़ा है।
सड़क मार्ग से
हिमालय के निचले हिस्से में स्थित इस राज्य में सड़कों का जाल बिछा हुआ है। पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से से होते हुए भी यहां पहुंचा जा सकता है।दार्जीलिंग, कलिमपोंग, सिलिगुड़ी, गंगटोक और राज्य के अन्य शहरों से सीधे जुड़े हुए हैं।PC: wikimedia.org
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