70 एकड़ के क्षेत्र में फैला विशाल मंदिर, जिसके 5 शिखर और 44 द्वार होंगे। यूं ही अयोध्या में रामलला के मंदिर को भव्य मंदिर नहीं कहा जा रहा है। 44 द्वारों में 18 द्वार ऐसे होंगे, जिसमें दरवाजे लगे होंगे। 18 द्वारों में 14 द्वार स्वर्णजड़ित होंगे और बाकि के 4 दरवाजे स्टोर में लगे होंगे। लेकिन इतने द्वारों में से भक्त किन-किन द्वारों से प्रवेश कर रामलला के दर्शन कर सकेंगे?

कौन से द्वार से प्रवेश करने पर गर्भगृह में रामलला की भव्य मूर्ति के किस तरफ का दर्शन होगा? किस द्वार से प्रवेश करने पर रामलला माता सीता, भाई लक्ष्मण और परमभक्त हनुमान संग सामने में विराजमान दिखेंगे? चलिए हम आपके इन सवालों का जवाब देते हैं।
दुनिया का है एकलौता मंदिर
अयोध्या में राम मंदिर को कितना भव्य बनाया जा रहा है, इस बारे में आए दिन कोई-न-कोई जानकारी हम आपको देते रहते हैं। क्या आप जानते हैं, राम मंदिर सिर्फ भव्य ही नहीं है बल्कि यह दुनिया का एकलौता मंदिर है जिसके 5 शिखर हैं। प्राचिन पद्धति के आधार पर तैयार हुई राम मंदिर की वास्तुकला नागरशैली से प्रेरित है जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय मंदिरों की खासियत है।
इस मंदिर के निर्माण में लोहे के सरिया का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया गया है। प्राचिन पद्धति के आधार पर ही पत्थरों को इस प्रकार जोड़कर तैयार किया गया है कि मंदिर कम से कम 1000 सालों तक सुरक्षित रह सके। मंदिर के भूतल में जिन दरवाजों को लगाया गया है, वे लकड़ी के बने हुए है। इन्हें बनाने की जिम्मेदारी हैदराबाद की एक कंपनी को सौंपी गयी है।

कौन से द्वार से भक्त करेंगे प्रवेश
राम मंदिर में भले ही 14 दरवाजे और 44 द्वार हो लेकिन भक्तों को प्रवेश करने के लिए एक द्वार निर्धारित होगा। मंदिर जितना भी विशाल और भव्य हो लेकिन भक्तों को किसी प्रकार की समस्या ना हो इस बात का खास ख्याल रखा जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर में प्रवेश करने के लिए भक्तों को सुग्रीव किला आना होगा। अयोध्या के बिड़ला धर्मशाला के सामने बनाए जा रहे द्वार से सुग्रीव किला होते हुए ही भक्त राम मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे।

जिस तरह दूसरे हिंदू मंदिरों में मुख्य द्वार मंदिर से थोड़ी दूरी पर होता है, ठीक उसी तर्ज पर श्रीराम जन्मभूमि परिसर से 600 मीटर की दूरी पर मौजूद बिड़ला धर्मशाला के सामने 35 फुट ऊंचे दो मुख्य द्वार बनाए गये हैं। इन द्वारों से प्रवेश करते ही 75 फुट चौड़ी रोड बनायी जा रही है जिसके दोनों तरफ फुटपाथ होगा। इसी पथ से होकर भक्त राम मंदिर की ओर आगे बढ़ेंगे।
इस द्वार से आगे बढ़ते ही थोड़ा आगे सुविधा केंद्र और बैगेज काउंटर बनाया जाएगा जहां अपना सामान रखकर भक्त मंदिर में दर्शन करने जाएंगे और इसी रास्ते से वापस लौट कर अपना सामान लेकर हनुमानगढ़ी मंदिर की ओर बढ़ सकेंगे।
मंदिर के चारों तरफ होगा रिंगरोड
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर का निर्माण 70 एकड़ के परिसर के उत्तरी हिस्से में किया गया है। मुख्य मंदिर के सबसे आखिरी हिस्से में गर्भगृह होगा। मंदिर के चारों तरफ रिंगरोड के तर्ज पर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इन सड़कों का इस्तेमाल आपातकाल के समय किया जा सकेगा।
मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी, अहिल्या आदि मंदिर भी बनाए जा रहे हैं लेकिन सबसे अधिक आकर्षित कुबेर टीले पर पक्षीराज जटायु की मूर्ति करेगी जो युद्ध के लिए तैयार मुद्रा में होगी। मंदिर के प्रवेश द्वार पर 2 रैंप और दो लिफ्ट लगाए जाएंगे। मंदिर परिसर में 25000 श्रद्धालु अपने जूते-चप्पल रख सकें, इसके लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था की जाएगी।

सरयू की बाढ़ से कैसे सुरक्षित रहेगा राम मंदिर
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुताबिक जिस जगह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की स्थापना के लिए भूमि पूजन किया था वह सरयू तल से करीब 105 मीटर ऊंचा है। रडार सर्वे में यह पता चला था कि गर्भगृह स्थल पर गहराई तक मलबा जमा है, जिसे हटाने का निर्णय लिया गया था। उस समय फैसला लिया गया था कि 40 फीट की गहराई तक जमीन खोदी जाएगी।
लेकिन 30 फीट की गहराई तक खोदने के बाद ही प्राकृतिक मिट्टी दिखने लगी थी। मिट्टी का समतलीकरण किया गया तो वह 40 फीट नहीं बल्कि 42 फीट हो गयी। ऐसे में जब राम मंदिर का निर्माण किया गया तो उसकी चौखट सरयू तल से 107 मीटर ऊंचा हो गया। इस वजह से सरयू नदी में आने वाली बाढ़ से भी मंदिर के सुरक्षित रहने की संभावनाएं बढ़ गयी।



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