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इस गांव में कुछ भी छुआ तो देना पड़ता है जुर्माना

भारत का सबसे रहस्यमयी गाँव मलाणा हिमाचल प्रदेश के कुल्लू घाटी की खूबसूरत वादियों के बीच स्थित है।

By Goldi

मलाणा के निवासी खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते है। यहां पर भारतीय क़ानून नहीं चलते है यहाँ की अपनी संसद है जो सारे फैसले करती है। मलाणा भारत का इकलौता गांंव है जहाँ मुग़ल सम्राट अकबर की पूजा की जाती है।

भारत की अनसुनी जगहें...

अपनी हर अनोखी परंपरा और विशेषता के कारण दुनियाभर में पहचान बना चुका कुल्लू जिले का मलाणा गांव वास्तव में दुनियां में अनोखा है।

अपनी विचित्र परंपराओं लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण पहचाने जाने वाले इस गांव में हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इनके रुकने की व्यवस्था इस गांव में नहीं है। पर्यटक गांव के बाहर टेंट में रहते हैं। आइये जानते हैं मलाणा से जुड़े दिलचस्प तथ्य.....

चीजों को छूना है मना

चीजों को छूना है मना

मलाणा के लोगों ने यहां हर जगह नोटिस बोर्ड लगा रखे हैं। इन नोटिस बोर्ड पर साफ-साफ चेतावनी लिखी गई है। गांव के लोग बाहरी लोगों पर हर पल निगाह रखते हैं, जरा सी लापरवाही भी यहां आने वालों पर भारी पड़ जाती है।

दुकान के बाहर से मांगना पड़ता है सामान

दुकान के बाहर से मांगना पड़ता है सामान

मलाणा गांव की दुकानों में बाहरी पर्यटक आसानी से सामान खरीद सकते हैं, पर बाहरी लोग दुकान में न जा सकते हैं न दुकान छू सकते हैं। बाहरी ग्राहकों के दुकान के बाहर से ही खड़े होकर सामान मांगना पड़ता है। दुकानदार पहले सामान की कीमत बताते हैं। रुपए दुकान के बाहर रखवाने के बाद सामन भी बाहर रख देते हैं।

यहां नहीं चलता भारत का कानून

यहां नहीं चलता भारत का कानून

कहा जाता है कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के मलाणा में विश्व की सबसे पुरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था अभी भी पल रही है। भारत का अंग होते हुए भी मलाणा की अपनी एक अलग न्याय और कार्यपालिका है। भारत सरकार के कानून यहां नहीं चलते। PC: Sanchita barua02

जमलू देवता को पूजते हैं

जमलू देवता को पूजते हैं

कहा जाता है कि अकबर बादशाह को सबक सिखाने के लिए जमलू देवता ने दिल्ली में बर्फ गिरवा दी थी। इसके बाद अकबर को जमलू देवता से माफी मांगनी पड़ी थी। इस गांव के रीति रिवाज हिंदुओं की तरह हैं यह लोग अपने आपको मानते भी हिंदू ही हैं। गांव में साल में एक बार यहां के मंदिर में अकबर की पूजा की जाती है। इस पूजा को बाहरी लोग नहीं देख सकते हैं।

अकबर की भी होती है पूजा

अकबर की भी होती है पूजा

स्थानीय लोग बताते हैं कि भीक्षा मांगते हुए दिल्ली पहुंचे दो साधुओं को सम्राट अकबर ने पकड़ कर उनसे उनकी झोली में से दक्षिणा छीन ली। इसके बाद जम्दग्नि ऋषि ने स्वप्न में अकबर को ये वस्तुएं लौटाने को कहा। अकबर ने फिर सैनिकों के हाथ यहां अपनी ही सोने की मूर्ति बनाकर बतौर दक्षिणा वापस भेजी। इस मूर्ति की तब से यहां पूजा होती है। यहां अकबर के लिए बकरा हलाल किया जाता है।PC: Jaypee

भांग

भांग

कुल्लू जिले का मलाणा ग्राम अपनी आनोखी परंपराओं से ज्यादा यहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की भांग के कारण जाना जाता है। यही कारण है कि यहां पर स्थानीय लोग कम विदेशी सैलानी सबसे ज्यादा आते हैं। वह भी एक दो दिन के लिए नहीं महीनों और सालों के लिए। दुनियां में सबसे अच्छी भांग यहां पैदा होती है। यहां की भांग (चरस) को मलाणा क्रीम और आइस चरस भी कहा जाता है।

मलाणा उत्सव

मलाणा उत्सव

यहां मलाणा फागली उत्सव फरवरी के मध्य में मनाया जाता है..तो वहीं मलाणा शौन उत्सव 15 अगस्त को मनाया जाता है।

यहां के घर हैं खास

यहां के घर हैं खास

मलाणा के घर तीन मंजिला के होते हैं..सबसे नीचा का हिस्सा पशुयों के लिए होता है जिसे खुदांग नाम से जाना जाता है, तो वहीं पहले मंजिल पर खाने की वस्तुएं, कपड़े आदि जिसे गयिंग बोलते हैं और दूसरे मंजिल पर बालकनी और रहने के कमरे आदि, जिसे पाटी कहा जाता है।

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