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पंजाब में स्वर्ण मंदिर ही नहीं, ये हिन्दू मंदिर भी हैं बेहद खास

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जब भी हम पंजाब का नाम सुनते हैं, हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम आता है अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर का जालियांवाला बाग़ का, आदि। इसके अलावा पंजाब में और भी बहुत कुछ है, अगर आप वाकई में अपनी संस्कृति, परंपराओं और प्राचीन इतिहास की सुंदरता को देखने के उत्सुक हैं, तो आपको एक बार पंजाब के वैभवशाली मन्दिरों को अवश्य देखना चाहिए।

मध्ययुगीन काल के मंदिरों से मसीह काल तक के मन्दिरों को आप पंजाब में देख सकते हैं । पंजाब स्थित इन खास मन्दिरों में हर साल लाखों की तादाद में देशी समेत विदेशी भक्त पहुंचते हैं, तो अगर आप आने वाले दिनों में पंजाब की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो पंजाब के खास हिन्दू मंदिरों को अवश्य देखें

श्री काली देवी मंदिर, पटियाला

श्री काली देवी मंदिर, पटियाला

Pc:Deepak143goyal

पटियाला जिले में, दुर्लभ वनस्पति वाले सुंदर उद्यान के सामने स्थित, श्री काली देवी मंदिर की नींव पटियाला के राजा भूपिंदर सिंह ने रखी थी। बताया जाता है कि, 200 साल पुराने इस मंदिर में वी काली की मूर्ति स्थापित करने के लिए खास कोलकाता से मंगाई गयी थी। नवरात्री के दौरान मंदिर के आसपास मेला आयोजित किया जाता है। इस मंदिर में देवी कलि को शराब, बकरे और मुर्गे की बली दी जाती है।

कैसे पहुंचे श्री-काली देवी मंदिर,
श्री काली देवी का मंदिर बस-स्टैंड और रेलवे स्टेशन से महज एक किमी की दूरी पर स्थित है, पर्यटक मंदिर तक रिक्शा या फिर ऑटो से आसानी से पहुंच सकते हैं। इस मंदिर में भक्तों के लिए लंगर भी आयोजित किया जाता है।

बाबा कन्हैया गिर मंदिर

बाबा कन्हैया गिर मंदिर

Pc:Rajput9k
बाबा कन्हैया गिर मंदिर पंजाब के प्रमुख हिन्दू मन्दिरों में से है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, और इसका नाम श्री श्री 1008 बाबा कन्हैया गिर जी महाराज, एक प्रसिद्ध संत के नाम पर है, जोकि मंदिर के संस्थापक भी हैं।

पंजाब के होशियारपुर जिले में मुकेरियन में स्थित यह प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा जाने-माने स्थानों में से एक है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में अधिकतर श्री कन्हैया गिर जी महाराज के अनुयायियों ही दर्शन करने पहुंचते हैं।
कैसे पहुंचे बाबा कन्हैया गिर मंदिर?
यदि आप इस पुराने मंदिर की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो आप होशियारपुर से ट्रेन या बस को पकड़ कर यहां आसानी से पहुंच सकते हैं।

मुक्तेश्वर महादेव मंदिर

मुक्तेश्वर महादेव मंदिर

पंजाब के प्रमुख मन्दिरों में से एक मुक्तेश्वर मंदिर शाहपुर कांदी डैम रोड पर स्थित पठानकोट शहर के निकट स्थित है, जिसे मुकेसरन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। पहाड़ी के शिखर पर स्थित मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में सफ़ेद संगमरमर से बनी शिवलिंग है जिसके ऊपर ताम्बे की योनि बनी हुई है। मंदिर के प्रमुख प्रांगण में भगवान् गणेश, भगवान् ब्र्ह्मा, भगवान् विष्णु, भगवान् हनुमान और देवी पार्वती की प्रतिमाएं स्थापित है।

मंदिर के आसपास कुछ गुफायों को भी देखा जा सकता है। पौराणिक कथायों की माने तो यह गुफाएं महाभारत काल की है, जहां पांडवों ने अज्ञात वास के समय कुह समय यहां व्यतीत किया था। इस मंदिर के पास हर साल बैशाखी के मौके पर मेला आयोजित किया जाता है, जिसे मुकेर्सन मेला भी कहा जाता है, इसके अलावा इस मंदिर में शिवरात्रि और नवरात्र के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने पहुंचते हैं।

कैसे पहुंचे
इस प्राचीन मंदिर तक पहुँचने का सबसे अच्छा साधन ट्रेन और बस है । श्रद्धालु पठानकोट जंक्शन की ट्रेन ले सकते हैं, और स्टेशन से आसानी से ऑटो के जरिये यहां पहुंच सकते हैं।

जुल्फा माता मंदिर

जुल्फा माता मंदिर

Pc:Unknown
पंजाब के रूपनगर, नांगल शहर में स्थित जूल्फा माता मंदिर एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक है। माना जाता है कि, जब देवी सती दक्ष के यज्ञ कुंड में कूद गयी थी, तब भगवान शिव मौत का तांडव करने लगे थे, वह देवी सती का शरीर लेकर जा रहे थे, तब देवी सती के बाल इसी जगह गिरे थे, इसीलिए इसे जुल्फा देवी मंदिर कहा जाता है।

मंदिर के प्रमुख द्वारा पर बायीं ओर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है, मंदिर की प्रमुख देवी श्री शक्ति हैं। मंदिर में एक पीपल का वृक्ष भी है, जहां बक्त मोली बांध कर भगवान से अपनी इच्छाएं पूरी करने की मन्नत मांगते हैं।

कैसे पहुंचे जुल्फा देवी मंदिर?
जुल्फा देवी मंदिर पहुँचने के लिए पर्यटक रूपनगर की ट्रेन या बस ले सकते हैं।

दुर्गियाना मंदिर,अमृतसर

दुर्गियाना मंदिर,अमृतसर

Pc: Guilhem Vellut
अमृतसर के लोहगढ़ गेट के पास स्थित माता दुर्गा का दुर्गियाना मंदिर को आप अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का हिन्दू संस्करण भी कह सकते हैं, जो सिक्ख धर्म का धार्मिक स्थल है। मंदिर को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है; लक्ष्मी नारायण मंदिर, दुर्गा तीर्थ और शीतला मंदिर। वास्तव में सबसे पहले मंदिर का निर्माण 16 वीं शताब्दी में ही हो गया था जिसे फिर से सन् 1921 में हरसाई मल कपूर द्वारा स्वर्ण मंदिर की वास्तुशैली की तर्ज़ पर निर्मित किया गया, और इसका उद्घाटन देश के भूतपूर्व महान समाज सुधारक व राजनेता पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा किया गया।

संगमरमर से बने इस मंदिर तक पहुँचने के लिए एक पुल बनाया गया है। मंदिर में काँगड़ा शैली की चित्रकला और शीशे का अद्भुत कार्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला है। यह मंदिर एक पवित्र झील के मध्य में बना हुआ है और मंदिर की वास्तुशैली हूबहू स्वर्ण मंदिर से मिलती जुलती है।

कैसे पहुंचे दुर्गियान मंदिर?
अमृतसर शहर में पहुँचने के बाद आपको दुर्गियाना मंदिर ढूंढने में बिल्कुल भी परेशानी नहीं होगी। दुर्गियाना मंदिर अमृतसर रेलवे स्टेशन से कुछ ही गज की दूरी पर है और अमृतसर बस स्टैंड से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर।

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