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रक्षा बंधन के दिन सदियों से सुनी रहती है इस गांव में भाईयों की कलाईयां, जानिए क्यों

रक्षाबंधन का दिन ऐसा होता है जब हर भाई बड़े ही गुमान के साथ अपनी कलाई पर बहन की बांधी हुई राखी को दिखाते हुए घुमते हैं। इस दिन शायद ही ऐसा कोई बच्चा, बुढ़ा या जवान होता है जिसकी कलाई पर राखी बंधी ना हो। लेकिन क्या आपको पता है, उत्तर प्रदेश में एक गांव ऐसा भी है जहां हाल के सालों में तो क्या पिछली कई सदियों से रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया गया है।

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इस गांव के हर एक भाई की कलाई रक्षाबंधन के दिन सूनी ही रहती है। ऐसा ही एक गांव राजस्थान में भी है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों गांवों में रक्षाबंधन नहीं मनाने का फैसला एक ही व्यक्ति के कारण लिया गया था।

कौन सा है ऐसा गांव जहां नहीं मनायी जाती है राखी

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से करीब 30 किमी दूर मुरादनगर में है सुराना गांव। इस गांव के लोग कभी रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाते हैं। इस दिन को यहां 'काला दिवस या दिन' के तौर पर यहां मनाया जाता है। बताया जाता है कि 12वीं सदी से इस गांव में कोई भी रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मना रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि रक्षाबंधन का दिन इस गांव के लिए श्रापित है। इसलिए जब भी इस गांव में कोई भी रक्षाबंधन मनाने की कोशिश करता है, तो कोई ना कोई परेशानी जरूर खड़ी हो जाती है।

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क्यों नहीं मनाया जाता है रक्षाबंधन

स्थानीय लोगों का कहना है कि 11वीं सदी में सुराना गांव को सोनगढ़ के नाम से जाना जाता था। उस समय इस गांव में करीब 20 हजार लोग निवास करते थे। बताया जाता है कि इस गांव में सैंकड़ों साल पहले राजस्थान से आए पृथ्वीराज चौहान के वंशज सोन सिंह ने हिंडन नदी के किनारे अपना ठिकाना बसाया था। जब इस बारे में मोहम्मद गोरी को पता चल गया तो उसने इस गांव पर हमला कर दिया और पूरे गांव के लोगों को हाथी के पैरों तले कुचलवा दिया। इस हमले में कई लोग मारे गये और कई घायल हो गये। इसलिए तब से इस गांव में रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया जाता है।

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राजस्थान में भी नहीं मनाया जाता है रक्षाबंधन

राजस्थान के एक गांव पाली में रहने वाले लोग जिन्हें पालीवाल कहा जाता है, वे भी रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इसकी वजह भी मोहम्मद गोरी ही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि साल 1230 में जब मोहम्मद गोरी का आतंक चारों तरफ फैला था, तब कन्नौज से सालिम सिंह को बुलाया गया था। कुछ दिनों बाद उसकी शह पर ही मोहम्मद गोरी ने इस गांव पर हमला बोल दिया और बड़ा नरसंहार किया। कहा जाता है कि गांव में उसने इतने लोगों की हत्या कर दी कि गांव के बाहर 4 मन जनेऊ पड़ा मिला था।

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इसके बाद पालीवाल मारवाड़ छोड़कर देश के अलग-अलग हिस्सों में चले गये। इसके बाद से पालीवाल चाहे जहां भी रहे लेकिन वे रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाते हैं। कहा जाता है कि इस गांव पिछले करीब 800 सालों से रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया गया है।

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