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संगीत दिवस के मौके पर जाने भारत की म्यूजिक सिटिज के बारे में

संगीत दिवस के मौके पर हम आपको लिए चलते हैं भारत के पांच संगीत के शहरों में...जहां की आवो-हवा में ही संगीत घुला हुआ है

By Goldi

भारतीय संगीत प्राचीन काल से भारत मे सुना और विकसित होता संगीत है। इस संगीत का प्रारंभ वैदिक काल से भी पूर्व का है। इस संगीत का मूल स्रोत वेदों को माना जाता है। हिन्दू परंपरा मे ऐसा मानना है कि ब्रह्मा ने नारद मुनि को संगीत वरदान में दिया था।

माना जाता है कि संगीत का प्रारम्भ सिंधु घाटी की सभ्यता के काल में हुआ हालांकि इस दावे के एकमात्र साक्ष्य हैं उस समय की एक नृत्य बाला की मुद्रा में कांस्य मूर्ति और नृत्य, नाटक और संगीत के देवता रूद्र अथवा शिव की पूजा का प्रचलन। सिंधु घाटी की सभ्यता के पतन के पश्चात् वैदिक संगीत की अवस्था का प्रारम्भ हुआ जिसमें संगीत की शैली में भजनों और मंत्रों के उच्चारण से ईश्वर की पूजा और अर्चना की जाती थी।

इसके अतिरिक्त दो भारतीय महाकाव्यों - रामायण और महाभारत की रचना में संगीत का मुख्य प्रभाव रहा। भारत में सांस्कृतिक काल से लेकर आधुनिक युग तक आते-आते संगीत की शैली और पद्धति में जबरदस्त परिवर्तन हुआ है। भारतीय संगीत के इतिहास के महान संगीतकारों जैसे कि कालिदास, तानसेन, अमीर खुसरो आदि ने भारतीय संगीत की उन्नति में बहुत योगदान किया है जिसकी कीर्ति को पंडित रवि शंकर, भीमसेन गुरूराज जोशी, पंडित जसराज, प्रभा अत्रे, सुल्तान खान आदि जैसे संगीत प्रेमियों ने आज के युग में भी कायम रखा हुआ है।

भारतीय संगीत में यह माना गया है कि संगीत के आदि प्रेरक शिव और सरस्वती है। इसका तात्पर्य यही जान पड़ता है कि मानव इतनी उच्च कला को बिना किसी दैवी प्रेरणा के, केवल अपने बल पर, विकसित नहीं कर सकता।

तो चलिए आज इसी संगीत दिवस के मौके पर हम आपको लिए चलते हैं भारत के पांच संगीत के शहरों में...जहां की आवो-हवा में ही संगीत घुला हुआ है....

वाराणसी

वाराणसी

उत्तर प्रदेश स्थित शहर वाराणसी को यूनेस्को द्वारा 'संगीत का शहर' के रूप में घोषित किया गया है।वेदों और पुराणों के अनुसार, वाराणसी को भगवान शिव (संगीत और नृत्य के विकासकर्ता) द्वारा बनाई गई भूमि के रूप में वर्णित किया गया है। इसके अलावा, अंतिम सतार निर्माता रविशंकर, शहनाई विशेषज्ञ बिस्मिल्ला खान और इस शहर से संबंधित मुखर संगीतकार गिरिजा देवी सहित कई उल्लेखनीय संगीतकारों का जन्म हुआ है...जिन्होंने संगीत को एक नई पहचान दिलाई है..जिस कारण इसे संगीत के शहर कहने में कोई हर्ज नहीं है...

PC:orvalrochefort

बैंगलूरू

बैंगलूरू

दक्षिण भारत स्थित कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का लोकप्रिय भारतीय शास्त्रीय संगीत कर्नाटक संगीत इस शहर को दूसरे स्थान पर विभूषित करता है।यह संगीत बेहद ही शांत को मन को भा जाने वाले संगीत में से है..यह संगीत आपके मन आपकी भावनाओं को गहराई से महसूस करता है।

पंजाब

पंजाब

संगीत की बात हो और पंजाब का नाम ना हो ये तो मुमकिन ही नहीं है..इस राज्य में हर चीज की शुरुआत संगीत और ढोल नगाड़ों से ही तो होती है।पंजाबी संगीत को जीवंत, संक्रामक ऊर्जा के साथ रचना की जीवंत शैली माना जाता है। पंजाब का ढोल का संगीत इतना उर्जावान होता है, जोकि एक मुर्दे में जान डाल दे।

राजस्थान

राजस्थान

पंजाब के बाद राजस्थान का संगीत भी कानों को बहुत सुकून पहुंचता है। तीन शहरों- उदयपुर, जोधपुर और जयपुर राजस्थान संगीत की उत्पत्ति का प्रतीक है। मौन्ड एक प्रथागत गायन शैली है जो शास्त्रीय चक्र में प्रसिद्ध है। राजस्थानी लोगों के जीवन पर बोलने वाले भावपूर्ण सरंगी ट्यूनों के साथ सजीव संगीत, जिसे एक शास्त्रीय लोक संगीत के रूप में जाना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह जगह संगीत के बारे में इतनी गंभीर है कि यहां जातियां उनके पूर्वजों द्वारा निर्मित संगीत के प्रकार के अनुसार विभाजित हैं - जैसे लैंगस, सपेरा, भगवा, जोगी और मांगीनिअ, इत्यादि।राजस्थान में आज भी युवा लोक संगीत की धुनों पर थिरकना पसंद करते हैं।

मुंबई

मुंबई

सपनों की नगरी मुंबई संगीत और नृत्य रूपों की विविधता प्रदान करता है - लोक लावानी और कोली से बड़े पैमाने पर बॉलीवुड संगीत तक, इस शहर में सब कुछ है! महारष्ट्र का लोकप्रिय लोक नृत्यसंगीत लावानी है जो काफी प्रसिद्ध है..जिसे अआप बॉलीवुड फिल्मों में भी देख सकते हैं।इसके अलावा मुंबई का कोली एक लोक संगीत है..जिसे मछुआरे गाते हैं। इस सबके अलावा बॉलीवुड के गाने लोगो को अपना दीवाना बनाते हैं।

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