उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ यानी नवाबी नगरी में स्थित इमामबाड़ा ऐतिहासिक इमारतों में शुमार है। बता दें, यह एक विशेष धार्मिक स्थल है। इसे आसिफ इमामबाड़ा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसे 1783 में लखनऊ के नबाव आसफ - उद - दौला द्वारा बनवाया गया था।
नवाब द्वारा अकाल राहत कार्यक्रम में निर्मित यह विशाल भव्य संरचना है, जिसे असाफाई इमामबाड़ा भी कहते हैं। इसकी संरचना में गोथिक प्रभाव के साथ राजपूत और मुग़ल वास्तुकला का मिश्रण दिखाई देता है।
परिसर में एक श्राइन, एक भूलभूलैया - यानि भंवरजाल, एक बावड़ी या सीढियोंदार कुआं और नबाव की कब्र भी है जो एक मंडपनुमा आकृति से सुसज्जित है।आइये जानते हैं इमामबाड़े से जुड़े रोचक तथ्य

बड़ा इमामबाड़ा
बड़ा इमामबाड़ा एक रोचक भवन है, जो मस्जिद है न मकबरा। कक्षों के निर्माण और वॉल्ट के उपयोग से इसमें सशक्त इस्लामी प्रभाव दिखता है।इमामबाड़ा वास्तव में एक विहंगम आंगन के बाद बना हुआ एक विशाल हॉल है, जहां दो विशाल तिहरे आर्च वाले रास्तों से पहुंचा जाता है। इमामबाड़े का केंद्रीय कक्ष करीब 50 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा है।PC: wikimedia.org

बड़ा इमामबाड़ा
बिना स्तम्भों वाले हाल की छत करीब 15 मीटर से अधिक ऊंची है। यह हॉल लकड़ी, लोहे और पत्थर के बीम के बाहरी सहारे के बिना खड़ी विश्व की सबसे बड़ी संरचना है, जिसे किसी बीम या गार्डर के बिना ही ईंटों को आपस में जोडक़र खड़ा किया गया है। जो वास्तुकला की भव्यता को परिलक्षित करता है।PC: Kaviamit

क्यों किया गया इमामबाड़े का निर्माण?
इमामबाड़े के निर्माण के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। माना जाता है कि सन् 1785 में लखनऊ में रोजगार की कमी की वजह से भयावह भुखमरी की समस्या आ गई।आवाम की भलाई और भर पेट भोजन की व्यवस्था करने के लिए इमामबाड़े के निर्माण का निर्णय लिया गया, जिसने हजारों की संख्या में लोगों को रोजगार मुहैया कराया।PC: Samreenansari4

भूल भुल्लैया का राज
इमामबाड़े में तीन विशाल कक्ष हैं, जिसकी दीवारों के बीच लंबे गलियारे हैं, साथ ही यहां 1000 से भी अधिक छोटे रास्ते हैं जो देखने में एक जैसे लगते हैं। पर ताज्जुब करने वाली बात यह है कि, ये सभी अलग-अलग रास्ते पर निकलते है। कुछ तो ऐसे भी हैं जिनके सिरे बंद है।PC: Surjasen

सुरंगों का है जाल है इमामबाड़ा
जानकारों की मानें तो भूलभुलैया के कुछ रास्ते इतने खतरनाक थे कि, इसमें लोग फंसकर अपनी जान भी गवां चुके हैं। कहा जाता है कि भूलभुलैया भूमिगत सुरंगों का एक ऐसा जाल है जो इमामबाड़े को दिल्ली, कोलकाता और फैजाबाद से जोड़ता है। जिसे अब लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बंद कर दिया गया है। PC:Varun Shiv Kapur

भूलभुल्लैया में बावड़ी का राज
भूलभुलैया में मौजूद बावड़ी सीढ़ीदार कुएं को कहते हैं, जो इमामबाड़े में एक अचंभित करने वाली संरचना है। यह पूर्व नवाबी युग की धरोहर है। शाही हमाम नामक यह बावड़ी गोमती नदी से जुड़ी है, जिसमें पानी से ऊपर केवल दो मंजिले हैं, शेष तल साल भर पानी के भीतर डूबा रहता हैं।
PC:Tanvi

शाही सुरंग में दफन है खजाना
शाही बावली से भी काफी सारी सुरंगे निकलती है जो अलग अलग राज्यों में जाती हैं। खज़ाने की कहानी सुनाते हुए गाइड ने हमें यह भी बताया कि जब अंग्रेज़ नवाब आसफ-उद्-दौला का खज़ाना लूटने आए तो उनके वफादार मुनीम खजाने की चाबी और नक्शा लेकर इसी बावली में कूद गए थे। इसके बाद अंग्रेज़ों ने अपने बहुत से सिपाही इस बावली में मुनीम या उनके शव को ढुंढने के लिए उतारे लेकिन कोई भी सिपाही वापस नही लौटा। वो खज़ाना इस इमामबाड़े या सुरंगों के जाल के बीच कहीं भी हो सकता है। उसका नक्शा और चाबी आज भी इसी बावली में दफ़न है।
PC:Faizhaider

धार्मिक है इमामबाड़ा
इमामबाड़े का ऐतिहासिक ही नहीं धार्मिक महत्व भी है और इसी के फलस्वरूप यहां से हर साल मुहर्रम के महीने में ताजिया का जुलूस निकाला जाता है।PC: Nikhil2789

इमामबाड़े की दीवारों के कान
इमामबाड़ा की मोटी दीवारों के कान भी हैं जो कहीं भी होने वाली हल्की सी आहट दूर तक सुन लेते हैं। अगर आप यहां फुसफुसा कर भी कोई बात कहें तो काफी दूर खड़ा इंसान उसे लफ्ज़-ब-लफ्ज़, बिल्कुल साफ सुन सकता है।
PC:Rajesh Passi

टिकट
गोमती नदी के किनारे बने बड़े इमामबाड़े में जाने की टिकिट 50 रुपए की है। यह टिकट लेकर आप सबसे पहले इस दरवाज़े से अन्दर घुसते हैं जो अनगिनत झरोखों से भरी हुई एक दीवार के मध्य बना है।
PC: ArpitSomani08

कैसे पहुंचे लखनऊ
हवाईजहाज द्वारा
पर्यटक लखनऊ हवाईजहाज द्वारा चौधरी चरण एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं..यहां से इमामबाड़ा के लिए टैक्सी मिल जायेगी।
ट्रेन द्वारा
लखनऊ का रेलवे स्टेशन चारबाग और लखनऊ जंक्शन है...स्टेशन से पर्यटक टैक्सी द्वारा लखनऊ दर्शन कर सकते हैं।
सड़क द्वारा
लखनऊ देश के सभी राजमार्गो से जुड़ा हुआ है...
PC: Nknarendra039



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