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इन सर्दियों जरुर घूमे भारत के मिनी तिब्बत को

देवदार के पेड़ों के घने जंगलों से घिरा धर्मशाला एक खूबसूरत हिल स्‍टेशन है जोकि कांगड़ा घाटी के पहाड़ों में स्थित है। दिल्‍ली से धर्मशाला के रूट के बारे में पढ़ें।

By Goldi

हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी है धर्मशाला जिसे पहले भाग्‍सु के नाम से जाना जाता था। देवदार के पेड़ों के घने जंगलों से घिरा धर्मशाला एक खूबसूरत हिल स्‍टेशन है कांगड़ा घाटी के पहाड़ों में स्थित है। यहां पर कई छोटे और खूबसूरत उपनगर जैसे मैकलोडगंज और धर्मकोट आदि भी हैं। इन जगहों पर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।

धर्मशाला की जीवनशैली में में तिब्‍बती, ब्रिटिश और हिमाचल की संस्‍कृति का मेल देखा जाता है। आप धर्मशाला में घूमते हुए तिब्बती शैली को भी देख सकते हैं। धर्म शाला में दलाई लामा का निवास स्थल है,साथ ही यहां निर्वासित तिब्‍बती भी रहते हैं। यह खूबसूरत जगह, खूबसूरत मठ, झीलें, अल्‍पाइन के पेड़ और प्राकृतिक छटाओं से भरपूर है..जीवन में एकबार तो इस जगह की खूबसूरती के दीदार अवश्य करने चाहिए...

धर्मशाला दिल्ली से करीबन 480 किमी की दूरी पर स्थित है..वीकेंड या फिर लॉन्ग वीकेंड के दौरान यहां परिवार या दोस्तों के साथ घूमने आया जा सकता है।

दिल्‍ली से धर्मशाला 480 किमी दूर है और वीकेंड पर घूमने के लिए आप इस खूबसूरत हिल स्‍टेशन पर आ सकते हैं।

धर्मशाला आने का सही समय

धर्मशाला आने का सही समय

अप्रैल से जून तक गर्मियों के महीने में धर्मशाला आ सकते हैं। इस दौरान यहां का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं पहुंचता है। दिल्‍ली की गर्मी से बचने के लिए आप यहां आ सकते हैं। सर्दियों में यहां अक्टूबर से मार्च के महीने में आ सकते हैं,इस दौरान धर्मशाली की पूरी घाटी बर्फ से ढक जाती है। इस दौरान ये शहर और भी ज्‍यादा खूबसूरत लगता है।PC:Travelling Slacker

दिल्‍ली से धर्मशाला का रूट

दिल्‍ली से धर्मशाला का रूट

पहला रूट : डॉ एनएस हार्डीकर रोड़ - एनएच 9 - एनएच 44 - मेहमदपुर - झांसा-तांगोरी रोड़ - एसएच 4 - एनएच 5 खार में - एनएच 205 - एनएच 503 - एनएच 3 - बोगली - खानयारा-दारी रोड़ - धर्मशाला (9 घंटे 30 मिनट - 476 किमी)

दूसरा रूट : डॉ एनएस हार्डीकर रोड़ - एनएच 9 - एनएच 44 - हरियाणा - एमडीआर 114 एसएच -11 - जिंद कैथल रोड़ - घलोरी में एनएच 7 - एसएच8 - रूपनगर में एनएच 205 - एनएच 503 - एनएच 3 - बगली - खानयारा-दारी रोड़ - धर्मशाला (11 घंटे 25 मिनट - 518 एचएम)

तीसरा रूट : डॉ एन एस हार्डीकर रोड़ - एनएच 9 - बरवाला रोड़ - एनएच 52 - हरियाणा में हिसार-तोहाना रोड़ - एसएच10 - पटन में एनएच 52 - एसएच 10 - एसएच 8 - एनएच 205 रूपनगर में - एनएच 503 - एनएच 3 - बगली - खानयारा-दारी रोड़- धर्मशाला (12 घंटे - 581 किमी)

पहला रूट छोटा है इसलिए आपको पहले रूट से ही जाना चाहिए।

पानीपत और कुरूक्षेत्र

पानीपत और कुरूक्षेत्र

हिंदुओं के पौराणिक ग्रंथ महाभारत में पानीपत और कुरूक्षेत्र दोनों ही पौराणिक महत्‍व रखते हैं। मुगल साम्राज्‍य का शासन होने के कारण यहां मुगल कला को देखा जा सकता है।

ऐतिहासिक महत्‍व रखने वाले इस शहर में ब्रह्मा सरोवर, शेख चिली का मकबरा, पानीपत संग्रहालय आदि देख सकते हैं।

PC:Manoj Khurana

अंबाला

अंबाला

भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना की मौजूदगी के कारण अंबाला शहर को आर्मी कैंटोनमेंट के नाम से जाना जाता है। यहां पर घग्‍गर और तांग्री नाम की दो नदियां बहती हैं। एक नदी उत्तर तो दूसरी दक्षिण में बहती है।

अंबाला शहर में 400 साल पुराना रानी का तालबा, शीशगंज गुरुद्वारा जिसे बावली साहिब भी कहते हैं, जैन मंदिर आदि भी देख सकते हैं।

PC: Varun Shiv Kapur

कांगड़ा

कांगड़ा

अंबाला से 255 किमी दूर है हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा शहर। इसे पहले नगरकोट के नाम से जाना जाता है और इसे देवभूमि अर्थात् देवताओं की भूमि भी कहा गया है।

यहां पर मसरूर रॉक कट मंदिर जिसे हिमालयी पिरामिड के नाम से भी जाना जाता है, देख सकते हैं। इस मंदिर परिसर को भारतीय स्‍थापत्‍यकला में शिखर शैली में बनाया गया है। कांगड़ा में ज्‍वालाजी मंदिर और कांगड़ा किला आदि देख सकते हैं।PC:Akashdeep83

नामग्‍याल मठ

नामग्‍याल मठ

नामग्‍याल मठ को दलाई लामा मंदिर भी कहा जाता है। ये 14वें दलाई लामा तेंजिन ग्‍यात्‍सो का निजी मठ है। ये मठ इतनी ऊंचाई पर स्थित है कि यहां से हिमालय की धौलाधर पहाडियों को देखा जा सकता है। यहां लगभग 200 तिब्‍बती भिक्षु रहते हैं जो बौद्ध, अंग्रेजी की आधुनिक शिक्षा और तिब्‍बती भाषा को सीखने आते हैं।PC: Dave Kleinschmidt

मैकलोडगंज

मैकलोडगंज

मैकलोडगंज, धर्मशाला के उपनगरों में से एक है। इस जगह बड़ी संख्‍या में तिब्‍बती लोग रहते हैं इसलिए यहां पर आपको तिब्‍बती महत्‍व रखने वाले स्‍थान देखने को मिलेंगें। यहां पर तिब्‍बत संग्रहालय, भाग्‍सु झरना, चर्च ऑफ सैंट जॉन जैसी कुछ जगहें देख सकते हैं। मैकलोड़गंज बेहद खूबसूरत जगह है।PC:Rignam Wangkhang

त्रिउंड

त्रिउंड

धर्मशाला सिटी सेंटर से 6 किमी और मैकलोडगंज से 9 किमी दूर है पॉपुलर ट्रैकिंग डेस्टिनेशन त्रिउंड। ये छोटा सा पहाड़ी गांव कांगड़ा घाटी में धौलाधर पहाडियों की तलहटी में 9,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

ये जगह ट्रैकिंग के लिए बहुत मशहूर है। हरियाली से भरी इस जगह पर कई ओक और देवदार के पेड़ हैं। इस रास्‍ते में पूरी घाटी का बेहद खूबसूरत दृश्‍य देखने को मिलता है।PC:Alok Kumar

ग्‍यूतो मठ

ग्‍यूतो मठ

बौद्ध तीर्थस्‍थलों में ग्‍यूतो मठ प्रमुख स्‍थान माना जाता है। इसे पंद्रहवी शताब्‍दी में बनवाया गया था और बीसवीं शताब्‍दी में इसे पुर्नस्‍थापित किया गया था। इस मठ में दुनियाभर से लोग तांत्रिक मेडिटेशन सीखने आते हैं।

काफी ऊंचाई पर होने के कारण इस मठ से ब्‍यास नदी और धौलाधर पहाडियों का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। मट परिसर के अंदर शाक्‍यमुनि बौद्ध की मूर्ति भी देख सकते हैं।PC:Steve Hicks

 कारेरी झील

कारेरी झील

धर्मशाला से 9 किमी दूर स्थित कारेरी झील का नज़ारा आपको मंत्रमुग्‍ध कर देगा। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण सइस झील पर ट्रैकिंग का मज़ा भी लिया जा सकता है। प्रकृति की गोद में बसी कारेरी नदी धौलाधर की पहाडियों से घिरा है। पर्वत की चोटि पर भगवान शिव का एक मंदिर भी है। दिसंबर से मार्च तक सर्दी की वजह से इस झील का पानी जम जाता है।PC: Shorya Pathania

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