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इस मामले में बिहार भारत के सभी राज्यों को पछाड़ सकता है

बिहार प्रांत को भारत के एक पिछड़े राज्य की संज्ञा दी जाती है, पर हमें नहीं भूलना चाहिए कि बिहार भारत का वो ऐतिहासिक केंद्र है जहां से भारत को विश्व स्तर पर एक अलग पहचान मिलनी शुरू हुई। प्राचीन मगध (वर्तमान बिहार) प्रारंभिक उच्च शिक्षा और उन्नत बुद्धिजीवियों का केंद्र माना जाता था। जहां से विष्णुगुप्त जैसी महान आत्मा और चंद्रगुप्त जैसे महान राजा निकले। जिन्होंने अपने ज्ञान व प्रबल इच्छाशक्ति से बाहरी ताकतों को अपने कदमों पर झुकने के लिए मजबूर किया।

हमारे साथ जानिए बिहार स्थित चुनिंदा ऐतिहासिक स्थलों के बारे में जो भले ही बिहार की वर्तमान स्थिति में कारण धूमिल होते जा रहे हैं लेकिन इनका ऐतिहासिक महत्व आज भी बरकरार है।

बिहार की राजधानी पटना

बिहार की राजधानी पटना

PC- Chandan Singh

पटना भारत का एक ऐतिहासिक शहर है, जिसे कभी पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। आज यह शहर बिहार राज्य की राजधानी है। यह शहर के बसने के पीछे एक रोचक कहानी जुड़ी है। कहा जाता है कि राजा पत्रक ने यह नगर अपनी प्रिय पत्नी पाटलि के लिया बनवाया था। इसलिए इस शहर का नाम रानी पाटलि के नाम पर पाटलिपुत्र पड़ा।

भारत पुरातात्विक विभाग की मानें तो इस शहर का इतिहास करीब 490 ईसा पूर्व का है। जब यहां हर्यक वंश के महान सम्राट अजातशत्रु ने रणनीतिक कारणों की वजह से अपनी राजधानी राजगीर से पाटलीपुत्र स्थानांतरिक कर ली थी। जिसके बाद यहां भारत के महान राजा चंद्रगुप्त का साम्राज्य स्थापित हुआ। इस शहर के ऐतिहासिक महत्व को जानने के लिए आप यहां की यात्रा कर सकते हैं।

राजनगर का नौलखा महल

राजनगर का नौलखा महल

PC- Shakti

बिहार के मधुबनी जिले में स्थित राजनगर अपने ऐतिहासिक नौलखा महल के लिए जाना जाता है। जिसका निर्माण यहां के राजा रामेश्वर ने 17वीं शताब्दी में करवाया था। लेकिन 1934 में आए भूकंप के कारण यह महल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। उसके बाद इसका पुन: निर्माण नहीं हो पाया।

ऐसा नहीं कि यह महल पूरी तरह ध्वस्त हो गया है, आज भी यह ऐतिहासिक महल राजनगर की शान है, जिसके अभी भी सुरक्षित बचे खूबसूरत भाग सैलानियों को यहां आने पर मजबूर करते हैं। इस महल के अंदर देवी-देवताओं की कई प्रतिमाएं स्थापित हैं। कहा जाता है यहां तंत्र साधना भी की जाती थी।

बिहार का मुंगेर

बिहार का मुंगेर

PC- Ivecos

मुंगेर, बिहार प्रांत का एक खूबसूरत जिला है। जो अपने ऐतिहासिक व वर्तमान महत्त के लिए प्रसिद्ध है। इस स्थल का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है, उस वक्त मुंगेर को मोदगिरी के नाम से जाना जाता था। यह नगर कभी बंगाल के अंतिम नवाब मीरकासिम की राजधानी भी था। बिहार का यह जिला आज अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बन चुका है।

उत्तराखंड के ऋषिकेश की भांति मुंगेर योग अध्यात्म के केंद्र के रूप में उभरा है। यहां कई आश्रम हैं जो योग सीखने वालों को प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। यहां स्थित बिहार स्कूल ऑफ योगा पूरे विश्व भर में जाना जाता है। जहां दूर-दूर से विद्यार्थी योग की शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं।

वैशाली

वैशाली

PC- Hideyuki KAMON

गंगा के किनारे बसा वैशाली अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। जहां के रमणीय स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से सैलानियों का आना जाना लगा रहता है। कहा जाता है कि यह स्थल गौतम बुद्ध को बहुत ही प्रिया था। इसलिए यहां बौद्ध से जुड़े कई स्मारक व स्थल मौजूद हैं, जिनका निर्माण बौद्ध धर्मे के अनुयायियों ने करवाया। ताकि भगवान बुद्ध के जीवन सिद्धांत व उनकी शिक्षाएं पूरे विश्व में प्रचारित हो सकें।

यहां मौजूद अशोक स्तंभ, बौद्ध स्तूप, विश्व शांति स्तूप, बावन पोखर मंदिर, राजा विशाल का गढ़ व कुण्डलपुर सैलानियों के मध्य मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं।

जलमंदिर पावापुरी

जलमंदिर पावापुरी

PC- Photo Dharma

पावापुरी, बिहार प्रांत के नालंदा जिले का एक खूबसूरत शहर है, जो मुख्यत: अपने जलमंदिर के लिए जाना जाता है। यह पूरा शहर कैमूर की पहाड़ियों पर स्थित है। यह शहर जैन तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता है। जलमंदिर जैन भक्तों द्वारा अत्यधिक सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान महावीर ने इसी स्थान पर अपनी अंतिम सांसे ली थी।

इसलिए यह स्थान जैनों के लिए काफी मायने रखता है। यहां एक संगमरमर मंदिर का निर्माण करवाया गया था जो अब बिहार में एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थस्थान है।

विश्व शांति स्तूप राजगीर

विश्व शांति स्तूप राजगीर

PC- Neil Satyam

विश्व शांति स्तूप बिहार के राजगीर स्थित एक ऐतिहासिक बौद्ध स्मारक है, जो पूरे विश्व को शांति का संदेश देता है। यह भारत में निर्मित 7 शांति पगोडा में से एक है जिसे देखने और समझने के लिए आपको बिहार की यात्रा करनी होगी। बता दें कि पगोड़ा उन स्तंभाकृति मंदिरों को कहा जाता है जो किसी संत व महान व्यक्ति के मरणोपरांत उनके अवशेषों पर निर्मित किया जाता है।

इस विश्व शांति स्तूप की निर्माण सन् 1969 में शांति व अहिंसा का संदेश देने के लिए करवाया गया था। यहां बुद्ध से जुड़ी चार मुर्तियां स्थापित हैं जो बुद्ध के जीवन-जन्म, ज्ञान, शिक्षण और मृत्यु के चार महत्वपूर्ण चरणों को दर्शाती हैं। यह शांति स्मारक भारत में जापानी वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरणों में से एक है।

शेरशाह का मकबरा

शेरशाह का मकबरा

PC- Nandanupadhyay

सम्राट शेर शाह सूरी की याद में बनवाया गया मकबरा बिहार प्रांत के रोहतास जिले के सासाराम में स्थित है। जिसका निर्माण 1545 ईसवी में करवाया गया था। शेरशाह का यह मकबरा भारत में भारत-अफगान वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जो शानदार कलाकृतियों और एक कृत्रिम झील के बीच में खड़ा है। बलुआ पत्थर निर्मित यह संरचना बिहार घूमने आए सैलानियों के लिए एक आदर्श स्थान है।

यह मकबरा ईंटों से बनी एक शानदार संरचना है जिसमें बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। आप सुबह से लेकर शाम के बीच किसी भी वक्त यहां आकर इस मकबरे को देख सकते हैं।

नालंदा विश्वविद्यालय

नालंदा विश्वविद्यालय

PC - Amila Tennakoon

बिहार स्थित नालंदा अपने खंडहर में तब्दील 'नालंदा विश्वविद्यालय' के लिए जाना जाता है, जो कभी प्राचीन शिक्षा का मुख्य केंद्र हुआ करता था। इस प्राचीन विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म के अवाला कई धर्मों के विद्यार्थी एकसाथ पढ़ते हैं। यहां तकरीबन 10 हजार विद्यार्थियों के साथ 1000 शिक्षक शिक्षा से जुड़े हुए थे। बता दें कि नालंदा को विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय कहा जाता है। यहां एक पुरातात्विक संग्रहालय भी मौजूद है, जहां प्राचीन अवशेषों को संभाल कर रखा गया है। इस संग्रहालय में बुद्ध की विभिन्न मूर्तियों को साथ पुराने सिक्के, अभिलेख, तांबे से बने प्लेट-बर्तन मौजूद हैं।

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