उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कई दार्शनिक स्थल मौजूद है..जिन्हें देखने जार सालों लाखो पर्यटक पहुंचते है।लखनऊ को नबाबों की नगरी के नाम से जाना जाता है, जिसकी स्थापना नवाब आसफ - उद - दौला द्वारा की गई थी, उन्होने इसे अवध के नवाबों की राजधानी के रूप में पेश किया था।
लखनऊ में देखने और करने के लिए बहुत कुछ खास है।इसी क्रम में रेजीडेंसी, लखनऊ के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में से एक है, रेजीडेंसी में कई इमारतें शामिल हैं। इसका निर्माण नवाब आसफ-उद- दौला ने 1775 में शुरू किया करवाया था और 1800 ई. में इसे नवाब सादत अली खान के द्वारा पूरा करवाया गया।

कहां स्थित है रेजीडेंसी?
रेजीडेंसी पुराने लखनऊ को नये लखनऊ से कनेक्ट करता है। एक समय था, जब हजरतगंज में रहने वाले लोग रात को पुराने लखनऊ की तरफ जाने से डरते थे, कारण था बेलीगारद।PC:Ramnath Bhat

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया
रेजिडेंसी अवध प्रांत की राजधानी लखनऊ में रह रहे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों का निवास स्थान हुआ करती थी। जिसके प्रमुख भवनों में बैंक्वेट हॉल, डॉक्टर फेयरर का घर, बेगम कोठी, और उसके पास मौजूद एक मस्जिद जो आज भी अस्तित्व में है जहां आज भी नमाज अदा होती है।PC: Wobbly

आज भी देखी जा सकती है टूटी दीवारे
रेजीडेंसी की टूटी - फूटी दीवारों में आज भी तोप के गोलों के निशान बने हुए हैं। इस परिसर में एक खंडहर चर्च भी है जहां एक कब्रिस्तान है जिसमें लगभग 2000 अंग्रेज सैनिकों, आदमियों, औरतों और बच्चों की कब्र बनी हुई है।PC:Noopur Raval

कब्रगाह
इसी कब्रगाह के पास मौजूद एक दूसरी कब्र पर लिखा है ‘रो मत मेरे बेटे, मैं मरा नहीं हूं, मैं यहां सो रहा हूं'।PC:Anoopkn

मेमोरियल म्यूजियम
रेजीडेंसी में हर शाम को यहां के इतिहास पर प्रकाश ड़ाला जाता है। रेजीडेंसी परिसर में 1857 मेमोरियल म्यूजियम भी स्थापित किया गया है जहां 1857 में हुई भारत की आजादी की पहली क्रांति को बखूबी चित्रित किया गया है।PC:Ramnath Bhat

लोकप्रिय पर्यटन स्थल
हालांकि आज के समय में बड़े-बड़े लॉन और फूलों की क्यारी रेजिडेंसी की खूबसूरती में चार चांद लगाकर पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।PC:Tony

रात में पास से गुजरने से लगता है डर
इतना ही नहीं बताया जाता है कि, उसी दौर की बात है, जब रेजीडेंसी के पास से गुजरने पर मारो-काटो की आवाजें सुनायी देती थीं। अक्सर वहां पेड़ों पर सफेद पोशाक में प्रेत लटकते हुए दिखाई देते थे। अक्सर बेलीगारद के पीछे लाशें पायी जाती थीं।
PC: Khalid Ahmed

रात में जाने से डरते हैं लोग
बताया जाता है कि, एक बारे लखनऊ विश्वविद्यालय के तीन दोस्तों के बीच रेजीडेंसी के अंदर रात बिताने की शर्त लगी,कि किसमें इतनी हिम्मत है, जो रेजीडेंसी के अंदर रात बिता सके।PC: ReshmiC

रेजीडेंसी
अगले दिन तीनों दोस्त तीनों दोस्त बेलीगारद के अंदर पहुंचे। उन दिनों बेलीगारद के चारों ओर बाउंड्री वॉल टूटी हुई थी, कोई भी आसानी से अंदर जा सकता था। रात के बारह बजते ही तीन में से दो उठे और बोले, ठीक है, दोस्त हम चलते हैं, सुबह मिलेंगे। अपने दोस्त को सूनसान कब्रिस्तान में अकेला छोड़कर दोनों चले आये।PC: Vyom.Y

रेजीडेंसी
दूसरे दिन सुबह उठते ही जब दोनों दोस्त रेजीडेंसी पहुंचे, तो वहां दोस्त नहीं, उसकी लाश मिली। पुलिस के डर से दोनों फरार हो गये। बाद में पुलिस ने रेजीडेंसी पहुंच कर युवक की लाश को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दी।PC: Khalid Ahmed

रेजीडेंसी
पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में पता चला कि युवक की मौत हार्ट अटैक से हुई। हार्ट अटैक की वजह वो डर बताया गया, जिसका सामना भूत के साय में वह उस रात कब्रिस्तान में नहीं कर पाया।PC: Haider Abbas

कैसे हुई थी 1971 में जब युवक की मौत
दोनों दोस्त अपने जिग्री यार को कब्रिस्तान में घास पर बैठा अकेला छोड़कर चले गये तब, उसके कुछ ही देर बाद जब वो उठा, तो पाया कि किसी ने उसे पीछे से पकड़ा हुआ है। वो डर गया और हार्ट अटैक से मौत हो गई। सुबह पुलिस ने देखा जमीन में एक कील गड़ी हुई थी, जिसमें उसका कुर्ता फंसा हुआ था। यह कील किसी और ने नहीं उसी के दोस्तों ने जाने से पहले कुर्ते के ऊपर से जमीन में गाड़ी थी।
PC: Kumar shakti

रेजीडेंसी
भूत प्रेत होता है या नहीं इसका जवाब हमारे पास नहीं है। लेकिन हां ऐसी तमाम कहानियों की वजह से बेलीगारद रात के सन्नाटों में हॉन्टेड प्लेस बन जाती है। लेकिन सुबह की सैर के लिये लखनऊ में इससे अच्छी कोई जगह नहीं।
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