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वेकेशन, फ़न, पार्टी, एडवेंचर सभी के लिए बेस्ट हैं नार्थ इंडिया के ये टॉप 10 बजट डेस्टिनेशंस

Written By: Belal Jafri

टूरिज्म की दृष्टि से भारत के उत्तरीय हिस्से का हमेशा ही विशेष महत्त्व रहा है। चाहे मंदिर हों या फिर खूबसूरत लैंडस्केप, मन मोह लेने वाली वादियां, अनूठा वन्यजीवन, नदियों के उद्गम स्थल यहां ऐसा बहुत कुछ है जिस कारण आज देश के अलावा विदेशों से आने वाले पर्यटक उत्तर भारत की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। आज जहां एक तरफ उत्तर भारत में कई ऐसे पर्यटन स्थल मौजूद हैं जहां आसानी से पहुंचा जा सकता है तो वहीं दूसरी ओर कई डेस्टिनेशंस ऐसे भी हैं जो बेहद दुर्लभ और जहां पहुँचाना दुर्गम है।

गौरतलब है कि उत्तर भारत में यात्रा का असली मज़ा तब है जब आप अपनी यात्रा सड़क मार्ग द्वारा करें। ऐसा कर के आप ऐसा बहुत कुछ देख सकते हैं जिसकी कल्पना शायद ही अपने की हो। तो इसी क्रम में आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से अवगत कराने जा रहे हैं उत्तर भारत में मौजूद टॉप 10 डेस्टिनेशनों से जो एक तरफ जहां बेहद खूबसूरत हैं तो वहीं बड़े ही सस्ते और आपके बजट में हैं। तो आइये अब देर किस बात की जानें उत्तर भारत में मौजूद टॉप 10 बजट डस्टिनेशनों को गहराई से।

मसूरी

मसूरी, पहाडियों की रानी के रूप में लोकप्रिय है जो उत्‍तराखंड राज्‍य के नैनीताल जिले में स्थित एक हिल स्‍टेशन है। यह महान पर्वत हिमालय की तलहटी पर समुद्र स्‍तर से 1880 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ शहर है। यह हिल स्‍टेशन शिवालिक पर्वतमाला और दून घाटियों के अद्धुत दृश्‍य प्रदान करता है। इस जगह को यमुनोत्री और गंगोत्री के धार्मिक केंद्रों के लिए प्रवेश द्वार भी माना जाता है। यह खूबसूरत हिल स्‍टेशन यहां स्थित प्राचीन मंदिरों, पहाडियों, झरनों, घाटियों, वन्‍यजीव अभयारण्‍यों और शैक्षिक संस्‍थानों के लिए लोकप्रिय है। ज्‍वाला देवी मंदिर, नाग देवता मंदिर और भद्रराज मंदिर, मसूरी और उसके आसपास स्थित कुछ नामचीन धार्मिक स्‍थलों में से एक हैं।

तवांग

अरुणाचल प्रदेश के सबसे पश्चिम में स्थित तवांग जिला अपनी रहस्यमयी और जादुई खूबसूरती के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस जिले की सीमा उत्तर में तिब्बत, दक्षिण-पूर्व में भूटान और पूर्व में पश्चिम कमेंग के सेला पर्वत श्रृंखला से लगती है। ऐसा माना जाता है कि तवांग शब्द की व्युत्पत्ति तवांग टाउनशिप के पश्चिमी भाग के साथ-साथ स्थित पर्वत श्रेणी पर बने तवांग मठ से हुई है। 'ता' का अर्थ होता है- 'घोड़ा' और 'वांग' का अर्थ होता है- 'चुना हुआ।' तवांग में देखने के लिए मठ, पहाड़ों की चोटी और झरने सहित कई चीजें हैं, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। तवांग के कुछ प्रमुख आकर्षण में तवांग मठ, सेला पास और ढेर सारे जलप्रपात हैं, जिससे यह बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए भी पसंदीदा स्थान बन जाता है।

मेकलियोदगंज

मेकलियोदगंज पर्यटन का एक प्रमुख आकर्षण है जो काँगड़ा से 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह दलाई लामा की गद्दी है और समुद्र सतह से 1770 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह युद्ध के दौरान तीन दशकों तक तिब्बती सरकार का मुख्यालय भी था। इस स्थान पर एक सुंदर मठ हैं जहाँ भगवान बुद्ध, पद्मसंभव और अवलोक्त्वश्वरा के बड़े चित्र हैं। मेकलियोदगंज के अन्य बौद्ध और तिब्बती स्थानों में नामग्याल मठ, गोम्पा दिप तीस-चोक लिंग (एक छोटा मठ) और तिब्बती कला प्रदर्शन संस्थान शामिल हैं। इसके अलावा मेकलियोदगंज की यात्रा के दौरान पर्यटक तिब्बतीयन वर्क्स और लेखागारों का पुस्कालय, गंग्चें क्यिशोंग, मणि लाखंग स्तूप, नेचुंग मठ और नोर्बुलिंग्का संस्थान की सैर भी कर सकते हैं।

तीर्थान

तीर्थान घाटी वहाँ स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के कारण पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। शोजा में स्थित यह घाटी पर्यावरण क्षेत्र के अंतर्गत आती है और राष्ट्रीय पार्क पर प्रदूषण के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए विभिन्न उपाय किये गए हैं। पर्यटक इस घाटी की नदियों में मछली पकड़ने का आनंद भी उठा सकते हैं। इस स्थान का शुमार हिमाचल के सबसे सुन्दर और सस्ते स्थानों में है। यदि आप हिमाचल में हैं तो इस स्थान की यात्रा अवश्य करें। आपको बता दें कि यहां रुकने के लिए कई स्थान ऐसे भी हैं जहां हज़ार रुपए से कम में आप प्रति दिन के हिसाब से रह सकते हैं।

वाराणसी

वाराणसी को बनारस और काशी के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर, दुनिया में सबसे प्राचीन और निरंतर आगे बढ़ने वाला शहर है। इस शहर को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। भगवान शिव, हिंदुओं के प्रमुख देवता है जिन्‍हे सृजन और विनाश का प्रतीक माना जाता है। वाराणसी, हिंदू धर्म के सबसे पवित्रतम शहरों में से एक है। इस शहर को लेकर हिंदू धर्म में बड़ी मान्‍यता है कि अगर कोई व्‍यक्ति यहां आकर मर जाता है या काशी में उसका अंतिम सस्‍ंकार हो, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है यानि उस व्‍यक्ति को जन्‍म और मृत्‍यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। इसीलिए, इस जगह को मुक्ति स्‍थल भी कहा जाता है।

आगरा

देश की राजधानी दिल्ली से 200 किमी दूर उत्तरप्रदेश का शहर आगरा ताजमहल के लिए जाना जाता है। यहां स्थित ताजमहल के अलावा आगरा का किला और फतेहपुर सिकरी भी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल है। आगरा का इतिहास 11वीं शताब्दी से मिलता है। गुजरते समय के साथ यहां हिन्दू और मुस्लिम दोनों शासकों ने शासन किया। इसलिए यहां दो तरह की संस्कृति का संगम देखने को मिलता है। आगरा गोल्डन ट्रेंगिल का एक हिस्सा है, जिसके अंतर्गत आगरा, जयपुर और दिल्ली आते हैं। दिल्ली से नजदीक होने के कारण पर्यटक आगरा के लिए एक दिन के ट्रिप को ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसा नहीं है कि आगरा में सिर्फ ताजमहल ही है। इसके अलावा भी यहां घूमने खाने की कई जगह है।

मनाली

मनाली, हिमाचल प्रदेश राज्‍य में समुद्र स्‍तर से 1950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पर्यटकों की पहली पसंद है और ऐसा हिल स्‍टेशन है जहां पर्यटक सबसे ज्‍यादा आते है। मनाली, कुल्‍लु जिले का एक हिस्‍सा है जो हिमाचल की राजधानी शिमला से 250 किमी. की दूरी पर स्थित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, मनाली का नाम मनु से उत्‍पन्‍न हुआ है जिन्‍हे सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रहमा ने बनाया था। ऐसा माना जाता है कि मनु इसी जगह पर जीवन के सात चक्रों में बने और मिटे थे। मनाली आपे पर्यटकों के बीच यहां के सुंदर दृश्‍यों, गार्डन, पहाड़ो, और सेब के बागों के लिए जाना जाता है।

लेह

लेह शहर इंडस नदी के किनारे कराकोरम और हिमालय की श्रृंखला के बीच स्थित है। इस जगह की प्राकृतिक सुन्दरता देश भर से पर्यटकों को साल के बारहों महीने अपनी ओर खींचती है। इस शहर में ज़्यादातर हिस्से में मस्जिद और बौद्ध स्मारक हैं जो सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में बनाये गए थे। एक बहुत पुराना, नामग्याल डायनेस्टी का राजा सेंग्गे नामग्याल का नौ मंजिल का महल, इस जगह का मुख्य आकर्षण है जो मेडिएवल ऐरा के वास्तुशिल्पीय ढंग को दर्शाता है। खरीददारी में रुचि रखने वाले पर्यटक तिब्बती गहने, ऊनी कपड़े और हाथ से या मशीन से बुने कालीन खरीद सकते हैं।

अमृतसर

पंजाब में स्थित अमृतसर सिक्ख समुदाय का अध्यात्मिक और सांस्कृतिक केन्द्र है। यह उत्तर-पश्चिम भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक है। इस शहर की स्थापना 16वीं शताब्दी में चौथे सिक्ख गुरू, गुरू रामदास जी ने किया था और इसका नाम यहां के एक पवित्र तालाब अमृत सरोवर के नाम पर पड़ा। 1601 में गुरू रामदास जी के उत्तराधिकारी गुरू अर्जुन देव जी ने अमृतसर का विकास किया। उन्होंने यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण कार्य भी पूरा किया, जिसकी शुरुआत गुरू रामदास जी ने की थी। 1947 के बंटवारे से पहले अमृतसर अविभाजित पंजाब का व्यापारिक और वाणिज्यिक महत्व का शहर था।

कलसी

कलसी एक सुंदर पर्यटन गंतव्य है जो उत्तराखंड के देहरादून जिले में समुद्र स्तर से 780 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह जगह जौनसार-बावर आदिवासी क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है जो दो नदियों, यमुना और टोंस के संगम पर स्थित है। यह जगह विभिन्न प्राचीन स्मारकों के, साहसिक खेल और पिकनिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। अशोक रॉक ईडिक्ट, भारतीय पुरालेखों के इतिहास में से एक महत्वपूर्ण स्मारक और कलसी के लोकप्रिय पर्यटक आकर्षणों में से एक है। यह वोह पत्थर है जिसपे मौर्य राजा, अशोका के 14 वे फरमान 253 ई.पू. में उत्कीर्ण किया गया था। यह फरमान राजा के बताये गए सुधारों और सलाह का संकलन है जिसको प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण किया है। इस संरचना की ऊंचाई 10 फुट और चौड़ाई 8 फुट है।

नार्थ इंडिया के टॉप 10 बजट डेस्टिनेशंस

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