यदि आप ये सोचते हैं कि सुंदरता या नेचुरल ब्यूटी आपको केवल उत्तर या दक्षिण भारत में देखने को मिलेगी तो अब समय है कि आप अपना नजरिया बदल लें क्योंकि देश के पूर्वोत्तर हिस्से में कई ऐसे प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन हैं जो आज भारत के अलावा दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं। इसी क्रम में आज हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं पूर्वोत्तर भारत के एक बेहद प्रमुख राज्य मेघालय से। 972 में मेघालय असम से अगल हुआ था। यहां मूल रूप से खासी, जयंतिया और गारो जनजाति के लोग रहते हैं।
यह राज्य फल और सुपारी के उत्पादन के लिए काफी प्रसिद्ध है। शिलांग राज्य की राजधानी है, जो कि देश का 23वां सबसे बड़ा शहर है। मेघालय उत्तर में असम और दक्षिण में बांग्लादेश से घिरा हुआ है। राज्य के करीब एक तिहाई हिस्से पर जंगल है। मेघालय के जंगल स्तनपाई, पक्षी और पौधों की जैव विविधता के लिए जाने जाते हैं। यहां के विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु और वनस्पति आपको कभी न भूलने वाला अनुभव दिलाएंगे।
देखा जाए तो मेघालय घूमना वास्तव में संस्कृति, प्रकृति, लोग और भाषा के बीच से होकर गुजरना है। मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्राकृतिक नजारों के कारण लोग मिजोरम को भी बेहद खूबसूरत जगह मानते हैं। मिजोरम के आकर्षणों में मुरलेन नेशनल पार्क और डम्पा टाइगर रिजर्व प्रमुख है। इसके अलावा यहां के झील और पालक दिल, ताम दिल और वनतावंग जलप्रपात भी बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता है।तो आइये अब जानें क्या क्या ख़ास है मेघालय में।

उमियाम झील
उमियाम झील जो बारापानी के नाम से भी जानी जाती है, मेघालय के री भोई जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। उमियाम नदी के ऊपर जल-विद्युत उत्पादन के लिए बनाए गए बांध के कारण 1960 में इस झील को बनाया गया। आज, यह झील अपने वाटर स्पॉट्स और साहसिक खेलों के कारण एक उत्कृष्ट पर्यटन स्थल के रुप में कार्य करती है।

मायलेननोंग
मायलेननोंग मेघालय का एक छोटा सा गांव है, शायद आपको जानके हैरत हो मायलेननोंग का शुमार एशिया के सबसे साफ़ सुथरे गांव में होता है। आपको बताते चलें कि इस गांव का मुख्य व्यवसाय कृषि है। इस गांव की ख़ास बात ये है कि यहां जगह जगह पर बांस क़ बने हुए कूड़ेदान लगाये गए हैं ताकि लोग उनमें कूड़ा फ़ेंक सकें।

नोहकालीकाई झरना
चेरापूँजी के समीप नोहकालीकाई झरना भारत का सबसे ऊँचा झरना है। चेरापूँजी प्रतिवर्ष की भारी बारिश के लिये जाना जाता है और इस झरने के जल का स्रोत यही बारिश है। इसलिये दिसम्बर से फरवरी के मध्य के सूखे समय में यह झरना काफी हद तक सूख जाता है। झरने के ठीक नीचे नीले-हरे रंग के पानी वाले तैरने के क्षेत्र बन गये हैं।

एलिफेंट फॉल
शहर से 8 किमी दूर स्थित एलिफेंट फॉल शिलांग का एक चर्चित पर्यटन स्थल है। यहां जाने के क्रम में खूबसूरत सड़कों का नजारा देख कर आप मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सकेंगे। इस झरने का स्थानीय नाम ‘का कशैद लाई पातेंग खोहस्यू' है, जिसका अर्थ होता है- तीन चरणों में पानी का गिरना। ज्ञात हो कि अंग्रेजों ने इस झरने का नाम एलिफेंट फॉल दिया, क्योंकि यहां का एक चट्टान हाथी से काफी मिलता-जुलता था। 1897 में इस क्षेत्र में आए भयानक भूकंप से इस चट्टान का कुछ भाग नष्ट हो गया था। इस झरने में काले चट्टान के ऊपर से दुधिया पानी बहता है, जो कि इसकी खासियत भी है।

लिविंग रूट ब्रिज
आज मेघालय का प्रसिद्ध शहर चेरापूँजी रबर के पौधों का घर है और साथ ही आज यहां से पूरे भारत के लिए सबसे ज्यादा रबर का उत्पादन किया जाता है। यहां पैदा होने वाले रबर के पौधों कि ये खासियत है कि 10 से 15 साल के बीच ये पूर्ण रूप से विकसित हो जाते हैं और उनकी जड़ें जमीन के अंदर चली जाती हैं जिनसे पुल या ब्रिज जैसी संरचना का निर्माण होता है। तो अब यदि आपको इन अद्भुत प्पुलों को देखना हो तो एक बार मेघालय की यात्रा अवश्य करें।

नारतियांग
कभी नारतियांग जयंतिया राजाओं की राजधानी हुआ करता था। आज यहां पूरे विश्व से पर्यटक व श्रद्धालु यहां की प्राचीन संस्कृति और धर्म को करीब से देखने के लिए आते हैं। नारतियांग में स्थित दुर्गा मंदिर जयंतिया साम्राज्य में हिंदू धर्म की उपस्थिति को सुनिश्चित करता है। हालांकि मंदिर के मूल आकार में काफी परिवर्तन कर दिया गया है, फिर भी आप यहां सैंकड़ों साल पहले की मूर्ति और वेदी देख सकते हैं। साथ ही आप उस तलवार को भी देख सकते हैं, जिसका इस्तेमाल राजाओं द्वारा बलि चढ़ाने के लिए किया जाता था।

गुफाएं
भारत में आपको सबसे लंबी गुफाएं मेघालय में देखने को मिलेंगी। यहां स्थित उमलावन गुफा अपने आप में विशेष है। उमलावन गुफा जोवाई से 60 किमी पूर्व की दिशा में लुमशनोंग गांव में स्थित है। ऐडवेंचर को पसंद करने वाले पर्यटकों के बीच यह जगह काफी चर्चित है। यह गुफा काफी समय तक लोगों की जानकारी में नहीं थी। हाल ही में इसके बारे में पता चला है। एक सव्रे से पता चलता है कि यह पूरे उपमहाद्वीप में न सिर्फ सबसे गहरी, बल्कि सबसे लंबी गुफा भी है।

शिलांग
पूर्व का स्कॉटलैंड कहा जाने वाला शिलांग बेशक पूर्वोत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। हरे घने जंगल, अनुपम प्राकृतिक छटा, बादलों से ढंके पहाड़, फूलों से आती मीठी-मीठी खूशबू, मिलनसार लोग और औपनिवेशिक मेहमान नवाजी के अलावा उस दौर की निशानियां शिलांग पर्यटन की खासियत है। एक ओर जहां शिलांग हरयाली से अटा पड़ा है, वहीं दूसरी ओर शहर की भागम-भाग वाली जिंदगी शिलांग पर्यटन को बहुआयामी बना देती है।

शॉपिंग, खाना और बहुत कुछ
जहां एक तरफ आपको मेघालय में प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत फॉर्म में दिखेगी तो वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत का ये बेहद खूबसूरत राज्य अपनी शॉपिंग और विशेषकर भोजन के लिए जाना जाता है। मेघालय के किसी भी शहर से आप स्थानीय जनजातियों द्वारा निर्मित सामग्री को ले सकते हैं। गौरतलब है कि यहां मिलने वाले ज्यादातर हैंडीक्राफ्ट लकड़ी से निर्मित होते हैं। यहां आने के बाद आप यहां का प्रसिद्ध मोमो थुक्पा और जदोह अवश्य खाइये। इनका जायका ऐसा है कि कभी जीवन में आप इसे भूल नहीं पाएंगे।

डौकी
डौकी, मेघालय के जयंतिया हिल में एक छोटा सा क़स्बा है। यहां की उमंगोट नदी में हर साल मार्च से अप्रैल महीने में एक बोट रेस का आयोजन किया जाता है जिसे देखने दूर दूर से लोग आते हैं। मजे कि बात ये है की ये नदी जयंतिया और खासी हिल के बीच एक बाउंड्री का काम करती है। 1932 में अंग्रेजों द्वारा यहां एक पुल का निर्माण कराया जो आज भी इन दोनों पहाड़ियों को जोड़ने का काम करता है।



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