वाराणसी या हरिद्वार की गंगा आरती या फिर प्रयागराज की यमुना आरती को देखकर दिल्लीवालों को भी जरूर मलाल होता होगा कि काश उन्हें भी ऐसी आरती में शामिल होने का मौका मिल जाता। जहां हजारों लोगों के शोर के बीच भी भगवान से जुड़ने का मौका मिलता हो। अब उन्हें किसी तरह का अफसोस करने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली में यमुना नदी का वह घाट जहां कभी कचड़े का अंबार लगा रहता था, दुर्गंध ऐसी की 2 पल खड़ा होना मुश्किल होता था। हर तरफ असामाजिक तत्वों का आना-जाना लगा रहता था। लेकिन अब यह सब बीते जमाने की बात हो चुकी है। दिल्ली के वासुदेव घाट का कायाकल्प कर यहां नियमित रूप से यमुना आरती की शुरुआत की गयी है।

कहां है वासुदेव घाट
दिल्ली में वासुदेव घाट रिंग रोड पर कश्मीरी गेट के अपोजिट में है। इस पूरे इलाके का विकास कर इसका सौन्दर्यीकरण किया गया है। घाट को न सिर्फ नये सिरे से विकसित किया गया है बल्कि आसपास के क्षेत्रों को आकर्षक कलाकृतियों और फव्वारों से सजाया गया है। परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के नये स्पॉट के रूप में यह जगह दिल्लीवालों को खूब पसंद भी आ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार इस घाट का विकास दिल्ली के राज्यपाल एलजी वी.के. सक्सेना की पहल पर किया गया है। इस घाट पर काशी के दशाश्वमेध घाट के तर्ज पर ही सजाया भी गया है, जिससे यहां आरती में शामिल होने वाले लोगों को वाराणसी की प्रसिद्ध आरती की वाइव्स मिल सकें।
कब होती है यमुना आरती
दिल्ली के वासुदेव घाट पर प्रयागराज की यमुना आरती की तरह नियमित रूप से आरती की जाएगी। दिल्ली में पहली यमुना आरती 20 मार्च को की गयी जिसमें राज्यपाल खुद भी शामिल हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सप्ताह में दो दिन, मंगलवार और रविवार को यहां शाम के समय यमुना आरती की जाएगी। पहले दिन से ही यमुना आरती दिल्ली वालों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुकी है।

बताया जाता है कि धीरे-धीरे जैसे-जैसे आरती में शामिल होने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जाएगी, आरती के दिन भी बढ़ा दिये जाएंगे। बता दें, वासुदेव घाट का सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन कश्मीरी गेट है। अगर आप आरती में शामिल होने का प्लान बना रहे हैं तो पार्किंग की समस्या से बचने के लिए अच्छा है कि अपनी गाड़ी के बजाए मेट्रो से ही जाएं।
यूं किया गया वासुदेव घाट का कायाकल्प
वासुदेव घाट दिल्ली में यमुना का पहला घाट है जिसे डीडीए ने विकसित किया है। यह घाट 16 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है जिसकी लंबाई 145 मीटर है। घाट से यमुना नदी की दूरी महज 25 कदमों की है। घाट के किनारों पर लगभग 5 हेक्टेयर के क्षेत्र को चार बाग की तरह ग्रीन एरिया में बदल दिया गया है। मुगल गार्डन के तर्ज पर ही यहां पारंपरिक छतरियां बनायी गयी हैं।
इसके साथ ही यहां देवी यमुना की मूर्ति और फ्लावर बेड भी बनाया गया है जहां मौसमी फूलों के साथ ट्यूलिप जैसे फूलों के पौधे भी लगाए जाएंगे। साथ में विभिन्न प्रजातियों के 2000 से पेड़ और रिवराइन घास भी लगायी गयी है। पूरे घाट पर आकर्षक लाइटिंग की गयी है। पैदल चलने वाले लोगों की सुविधा के लिए 2.1 मीटर चौड़ा और 1.8 किमी लंबा पैडेस्ट्रियन ट्रैक बनाया गया है।

इसके अलावा 1.3 किमी लंबा साइकिल ट्रैक भी बनाया गया है जो इसे मॉर्निंग वॉक और एक्सर्साइज करने वालों की पसंदीदा जगह बनाएगी। घाट के पास ही उत्तर प्रदेश के जालेसर में बना 300 किलो का एक घंटा लगाया गया है। बता दें, अयोध्या के राम मंदिर में लगा 800 किलो के घंटा को भी जालेसर में ही बनाया गया था।



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