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इस मंदिर में मन्नत रातों रात होती है पूरी..नवरात्रों में लगता है भक्तो का तांता

पावागढ़ चंपानेर के निकट स्थित एक पहाड़ी है और एक ऐसी पहाड़ी है जिस पर प्रसिद्ध महाकाली मंदिर स्थित है।

By Goldi

जहां दादा दादी मम्मी पापा घूमने क लिए धार्मिक स्थल की खोज करते हैं..तो वहीं बच्चे ऐसी जगहें घूमने की सोचते जहां वह जमकर मस्ती कर सके और कुछ नया सीख सके।

इसी क्रम में हम आज आपको अपने लेख से ऐसी जगह की सैर कराने जा रहे हैं..जहां जाने से पूरे परिवार की छुट्टियाँ शानदार और यादगार बनेगी।

इस जगह का नाम पावागढ़ जोकि वड़ोदरा से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह पावागढ़ चंपानेर के निकट स्थित एक पहाड़ी है और एक ऐसी पहाड़ी है जिस पर प्रसिद्ध महाकाली मंदिर स्थित है।

पहले इस पहाड़ी की चड़ाई करना नामुकिन सा था..क्योंकि,यह पहाड़ी चारो तरफ गहरी खाई से घिरी हुई है जिस कारण यहां वायु का वेग ज्यादा रहता है।

बताया जाता है कि, यहां स्थित मंदिर जगतजननी के स्तन गिरने के कारण इस जगह को बेहद पूजनीय और पवित्र माना जाता है। यहां की एक खास बात यह भी है कि यहां दक्षिण मुखी काली मां की मूर्ति है, जिसकी दक्षिण रीति अर्थात तांत्रिक पूजा की जाती है।

कहां स्थित है ये मंदिर

कहां स्थित है ये मंदिर

महाकाली का यह मंदिर पावागढ़ चंपानेर के निकट स्थित एक पहाड़ी है स्थित है।PC:Gashwin Gomes

शक्तिपीठ

शक्तिपीठ

पावागढ़ में स्थित प्राचीन महाकाली का मंदिर माता के शक्तिपीठों में से एक है। बता दें, शक्तिपीठ उन पूजा स्थलों को कहा जाता है, जहां माता सती के अंग गिरे थे।PC: Anupamg

महाकाली मंदिर

महाकाली मंदिर

पौराणिक कथा के मुताबिक, पिता दक्ष के यज्ञ के दौरान अपमानित हुई सती ने योग बल से अपने प्राण त्याग दिए थे। सती की मृत्यु से व्यथित भगवान शिव उनके मृत शरीर को लेकर तांडव करते हुए ब्रह्मांड में भटकते रहे। माता के अंग जहां-जहां गिरे,वहीं वहीं शक्तिपीठ बनते गये।PC:Arian Zwegers

महाकाली मंदिर

महाकाली मंदिर

लोगो की माने तो पावागढ़ में माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा यहीं गिरा था जिसके कारण इस जगह का नाम पावागढ़ हुआ। इसीलिए यह स्थल बेहद पूजनीय और पवित्र मानी जाती है।

महाकाली मंदिर

महाकाली मंदिर

इस महाकाली मंदिर में दक्षिणमुखी काली मां की मूर्ति है, जिसकी तांत्रिक पूजा की जाती है।

नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालु

नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालु

नवरात्र के समय इस मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ती है। लोगों की यहां गहरी आस्था है। उनका मानना है कि यहां दर्शन करने के बाद मां उनकी हर मुराद पूरी कर देती है

रोपवे से पहुंच सकते हैं मंदिर

रोपवे से पहुंच सकते हैं मंदिर

पर्यटक इस पहाड़ी पर रोप-वे लेकर श्रद्धालु पावागढ़ पहाड़ी के ऊपरी हिस्से तक पहुंच सकते हैं। रोप-वे से उतरने के बाद आपको लगभग 250 सीढ़ियां चढ़ना होंगी, तब जाकर आप मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचेंगे।

पर्यटकों को खूब लुभाता है पावगढ़

पर्यटकों को खूब लुभाता है पावगढ़

पावगढ़ में ऊँची ऊँची पहाड़ी से मंदिर के आसपास के अलौकिक नजारे पर्यटकों के मन को खूब भाते है।

कैसे जाएं

कैसे जाएं

वायुमार्ग : यहां से सबसे नजदीक अहमदाबाद का एयरपोर्ट है, जिसकी यहां से दूरी लगभग 190 किलोमीटर और वडोदरा से 50 किलोमीटर है।

रेलमार्ग: यहां का नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन वडोदरा में है जो कि दिल्ली और अहमदाबाद से सीधी रेल लाइनों से जुड़ा हुआ है। वडोदरा पहुंचने के बाद सड़क यातायात के सुलभ साधन उपलब्ध हैं।

सड़क मार्ग: प्रदेश सरकार और निजी कंपनियों की कई लक्जरी बसें और टैक्सी सेवा गुजरात के अनेक शहरों से यहां के लिए संचालित की जाती है।

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