आज नवरात्र के पांच दिन पूरे हो चुके हैं। आज का दिन मां दुर्गा के एक अन्य रूप स्कंदमाता को समर्पित है। इन्हें स्कन्द माता इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि ये स्कन्द भगवान या भगवान कार्तिक की मां हैं। ज्ञात हो कि मां दुर्गा के अन्य रूपों की ही तरह मां का ये रूप भी बेहद निर्मल, मोहक और करुणामयी है। कहा जाता है कि व्यक्ति ने चाहे जितने भी पाप किए हों और वो यदि मां के पास आये और क्षमा याचना करे तो मां उसे माफ़ कर देती हैं।
गौरतलब है कि स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प ली हुई हैं। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। सिंह भी इनका वाहन है।

जैसा कि हम आपको बता चुके हैं हमारी ये पूरी सीरीज मां दुर्गा और नवरात्रि को समर्पित है तो आज इसी क्रम में हम आपको अवगत कराएंगे पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चाइनीज काली मंदिर से।
कोलकाता के टांगरा में एक 60 साल पुराना चाइनीज काली मंदिर है। इस मंदिर की एक ख़ास बात ये है कि दुर्गा पूजा के दौरान प्रवासी चीनी लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। यहाँ आने वालों में ज्यादातर लोग या तो बौद्ध हैं या फिर ईसाई।
एक बात और है जो इस मंदिर को खास बनाती है वो ये है कि इस मंदिर के मुख्य पुजारी बंगाली ब्राह्मण होते हैं । इस मंदिर की एक दिलचस्प बात ये भी है कि यहां आने वाले मां के भक्तों को प्रशाद में न्यूडल, चावल और सब्जियों से बनी करी परोसी जाती है।



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