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राजस्थान का राजसी ठाट-बाठ तो बहुत देख लिया..अब घूमे राजस्थान के नेशनल पार्क

Written By: Goldi

उत्तर भारत में स्थित राजस्थान पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है..इस खूबसूरत राज्य को देखने हर साल लाखों की तादाद में देशी समेत विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। राजस्थान में आप सिर्फ राजसी ठाट को बखूबी देख सकते हैं।

यहाँ बने लगभग सारे किले व महल कई सदियों पहले स्थापित किये गए थे। पर आज भी ये राजसी शान से अपनी ऊंचाई के साथ, अपने आकर्षण के साथ शान से खड़े ,पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित

जयपुर के महलनुमा संग्रहालय में राजस्थान का इतिहास!

इसके साथ ही आपको अगर वाइल्ड लाइफ का शौक है तो भी राजस्थान आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नही है....राजस्थान के वन्यजीव पार्क में आप जंगली जानवर समते विभिन्न प्रजाति के पक्षियों को भी निहार सकते हैं। अगर आप राजस्थान में रहते हैं..और बाघ या फिर खूबसूरत पक्षियों को देखने की लालसा रखते हैं...तो हमारे आर्टिकल में बताये गये इन खूबसूरत नेशनल पार्क की सैर करना ना भूले...आइये स्लाइड्स में जानते हैं।

रणथंभोर नेशनल पार्क,सवाई माधोपुर

रणथंभोर नेशनल पार्क,सवाई माधोपुर

राजस्थान के दक्षिणी ज़िले सवाई माधोपुर में 1334 वर्ग किलोमीटर में फैला रणथंभोर नेशनल पार्क, देश के सबसे बड़े पार्को में से एक है।1980 में इस पार्क को नेशनल पार्क का दर्जा मिला और अब ये भारत के सबसे अच्छे बाघ रिज़र्व में से एक है। बाघों के अलावा, इस पार्क में सियार, चीते, हाइना, मगरमच्छ, जंगली सुअर, हिरण और कई तरह के जानवर हैं।फ़ोटोग्राफ़ी के लिए ये पार्क सबसे ज़्यादा पसंद किया जाता है।वैसे तो पार्क अक्टूबर से जून तक खुला रहता है, लेकिन बाघ देखने का सबसे अच्छा समय अप्रैल और मई है।PC:LuisVilla

सरिस्का नेशनल पार्क,अलवर

सरिस्का नेशनल पार्क,अलवर

सरिस्का नेशनल पार्क अलवर जिले में अरावली की पहाडि़यों में है और इसे सन् 1958 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसे सन् 1979 में टाइगर रिजर्व के रुप में ‘प्रोजेक्ट टाइगर' में शामिल किया गया था। यह राष्ट्रीय उद्यान सुंदर अरावली की पहाड़ियों में स्थित है तथा 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां घास, शुष्क पर्णपाती वन,चट्टानें और चट्टानी परिदृश्य दिखाई पड़ते हैं। इस क्षेत्र के बड़े हिस्से में धाक के वृक्ष पाये जाते है और यहां विभिन्न वन्यजीव प्रजातियं रहती हैं। सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान विविध प्रजातियों के जंगली जानवरों-तेंदुए, चीतल, सांभर, नीलगाय, चार सींग वाला हिरण, जंगली सुअर, रीसस मकाक, लंगूर, लकड़बग्घा और जंगली बिल्लियों का शरणस्थल है। इस राष्ट्रीय उद्यान में बड़ी संख्या में मोर,सैंडग्राउस, स्वर्ण कठफोड़वा और कलगी नागिन ईगल भी हैं।PC: Dan Lundberg

केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर

केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर

अगर आप पशु पक्षियों से प्यार करते हैं तो आपको केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान की सैर जरुर करनी चाहिए...यह भारत के राजस्थान में स्थित एक विख्यात पक्षी अभ्यारण्य है। यह पार्क करीब 28 किलोमीटर में फैला हुआ है, इस पार्क में वेटलैंड, सूखी घास के जंगल, जंगल और दलदल हैं। इसमें हजारों की संख्या में दुर्लभ और विलुप्त जाति के पक्षी पाए जाते है।मानसून के मौसम के दौरान देश के प्रत्येक भागों से पक्षियों के झुंड यहाँ आते हैं। पानी में पाए जाने कुछ पक्षी जैसे सिर पर पट्टी और ग्रे रंग के पैरों वाली बतख, कुछ अन्य पक्षी जैसे पिनटेल बतख, सामान्य छोटी बतख, रक्तिम बतख, जंगली बतख, वेगंस, शोवेलेर्स, सामान्य बतख, लाल कलगी वाली बतख, और गद्वाल्ल्स यहाँ पाए जाते हैं असाधारण रूप से विलक्षण राष्ट्रीय उद्यान वर्ष 1985 से यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है।PC:Asheeshmamgain

रेगिस्तान राष्ट्रीय अभयारण्य

रेगिस्तान राष्ट्रीय अभयारण्य

रेगिस्तान राष्ट्रीय अभयारण्य जैसलमेर जिले से 40 किलोमीटर दूर स्थित है। यह उद्यान राजस्थान समेत भारत का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ पार्क है। उद्यान का कुल क्षेत्र 3162 वर्ग किलोमीटर है। उद्यान का काफी बड़ा भाग लुप्त हो चुकी नमक की झीलों की तलहटी और कंटीली झाड़ियों से परिपूर्ण है। इसके साथ ही रेत के टीलों की भी बहुतायत है। उद्यान का 20 प्रतिशत भाग रेत के टीलों से ढका हुआ है। उद्यान का प्रमुख क्षेत्र खड़ी चट्टानों, नमक की छोटी-छोटी झीलों की तलहटियों, पक्के रेतीले टीलों और बंजर भूमि से अटा पड़ा है।इस पार्क में डेजर्ट लोमड़ी, डेजर्ट कैट, बंगाल फॉक्स, चिंकारा, भेड़िया और ब्लैकबैक जैसे जानवरो को देखा जा सकता हैं।PC:Chinmayisk

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य माउंट आबू का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। यहाँ मुख्य रूप से तेंदुए, स्लोथबियर, वाइल्ड बोर, साँभर, चिंकारा और लंगूर पाए जाते हैं। 288 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य की स्थापना 1960 में की गई थी। यहाँ पक्षियों की लगभग 250और पौधों की 110 से ज्यादा प्रजातियां देखी जा सकती हैं।यहां पर्यटक विदेशी पक्षियों की प्रजातियों को भी देख सकते हैं।
PC: Sampa Guha Majumdar

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